सात साल में सात कदम का भी नहीं हो पाया विकास छिंदवाड़ा (ईएमएस)। हर बार की तरह इस बार भी मध्य प्रदेश के बजट में राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय उपेक्ष का शिकार हुआ। शासन द्वारा सिंचाई कॉम्प्लेक्स सहित सडक़ों के लिए करोड़ों रूपए का बजट स्वीकृत किया लेकिन यूनिवर्सिटी के लिए इस बार भी कोई बजट नहीं मिला है। पिछले सात सालों से लगातार राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय को बजट में कोई फंड नहीं दिया जा रहा है। जिसकी वजह से अब तक न तो स्वीकृत स्टाफ की भर्ती हुई है और न ही भवन निर्माण कार्य शुरू हो पाया है। वर्तमानम में राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय का संचालन पीजी कॉलेज की लाईब्रेरी में किया जा रहा है। जहां ना तो स्टाफ के लिए बैठने की उचित व्यवस्था है और ना ही उत्तरपुस्तिकाओं के रखने के लिए उचित जगह है। कई बार विश्वविद्यालय प्रबंधन शासन से बजट की मांग चुका है लेकिन हर बार बजट में राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय को अनदेखा कर दिया जाता है। यूनिवर्सिटी में सात साल में सात कदम भी विकास नहीं हुआ है। ऐसे में विद्यार्थियों की उम्मीदें धूमिल हो रही हैं। सारना के पास आवंटित है जमीन राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय के भवन निर्माण के लिए सारना के समीप लगभग १२५ एकड भूमि का कई सालों पहले ही आवंटन किया जा चुका है। इतना ही नहीं भवन निर्माण की डिजाइन भी फाइनल हो चुकी है। लेकिन बार बजट में फंड ना मिलने की वजह से भवन निर्माण का काम शुरू ही नहीं हो पाया। शासन ने विश्वविद्यालय भवन के डिजाइन के अनुसार वर्ष 2019 में 486.45 करोड़ रुपए स्वीकृत किए थे। हालांकि समय के साथ अब भवन की लागत भी बढ़ गई है। बताया जाता है कि छह माह पहले शासन के निर्देश पर रिवाइच्ड बजट भेजा गया है। पूर्व में भवन के लिए स्वीकृत किए गए डिजाइन में फेरबदल कर दिया गया है। २०१९ में हुई थी यूनिवर्सिटी की स्थापना राजा शंकर शाह विश्वविद्यालय की स्थापना 14 अगस्त 2019 को की गई। भवन निर्माण के लिए 1२५ एकड़ जमीन का आवंटन भी कर दिया गया। 485 करोड़ रुपए के बजट का प्रावधान किया गया। विश्वविद्यालय के संचालन के लिए 400 पद स्वीकृत किए गए। वर्तमान में केवल चार पद भरे गए हैं, जिसकी वजह से विश्वविद्यालय से संबद्ध 130 कॉलेज और दो लाख विद्याॢथयों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। केवल परीक्षा कराने तक सीमित यूनिवर्सिटी अध्ययन, अध्यापन और परीक्षण के बिना विश्वविद्यालय की कोई उपयोगिता नहीं है। भवन, पर्याप्त स्टाफ, शिक्षण विभाग और संसाधन के अभाव में विश्वविद्यालय की गतिविधियां केवल परीक्षा कराने और रिजल्ट जारी करने तक सीमित हैं। यूनिवर्सिटी खुते जिले के विद्यार्थियों ने सपना देखा था कि यूनिवर्सिटी खुलते ही विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए बाहरी शहर राज्य जाने की आवश्यकता नहंी पडेगी। लेनिक पिछले सात सालों में विद्यार्थियोंं को यूनिवर्सिटी से कोई खास मदद नहीं मिली है। ईएमएस/मोहने/ 19 फरवरी 2026