मावठे की बेमौसम बारिश से गेहूं-चना की फसल चौपट, खेतों में गिरी फसलें; मौसम की मार से किसानों की टूटी कमर,अन्नदाता बोले– भारी नुकसान की आशंका रायसेन । जिले में मावठे की बेमौसम बारिश ने रबी की फसलों पर कहर बरपा दिया है। बुधवार को तड़के हुई मावठे की रिमझिम कहीं तेज बारिश और हवाओं के चलते कई गांवों में गेहूं और चना की फसलें खेतों में आड़ी होकर गिर गईं। किसानों ब्रजेश खंडेलवाल सरपंच गिरजेश नायक दीवानगंज का कहना है कि कटाई से पहले आई इस मावठे की बारिश ने उनकी महीनों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। विकासखंड सांची, तहसील गैरतगंज गौहरगंज बेगमगंज और सिलवानी क्षेत्र के किसानों ने बताया कि गेहूं की फसल दाने बनने की अवस्था में थी। तेज हवा के साथ हुई फुहार वाली बारिश से फसलें जमीन पर बिछ गईं, जिससे दाने काले पड़ने और अंकुरित होने का खतरा बढ़ गया है। चना की फसल में भी पानी भराव से दानों में सड़न की आशंका जताई जा रही है। उन्नतशील किसान शेर सिंह दाऊ, रेवा शंकर पटेल मदन पटेल सहजपुर, विजय पटेल,रामस्वरूप पटेल, राजेश यादव खुमान सिंह यादव ने कहा, “इस बार उत्पादन अच्छा होने की उम्मीद थी। लेकिन बारिश ने सबकुछ चौपट कर दिया। अगर दो-तीन दिन धूप नहीं निकली तो नुकसान और बढ़ जाएगा।” वहीं किसान रघुनाथ अहिरवार का कहना है कि गिर चुकी फसल की कटाई में भी अतिरिक्त लागत आएगी और उत्पादन आधा रह सकता है। कृषि विशेषज्ञ डॉ स्वनिल दुबे के अनुसार इस समय तेज बारिश और ओलावृष्टि जैसी स्थिति फसल के लिए बेहद नुकसानदायक होती है। गेहूं की फसल गिरने से दाने भराव प्रभावित होता है और गुणवत्ता घटती है, जिससे कृषि उपज मंडी में दाम कम मिलते हैं। चना में अधिक नमी से फफूंद लगने का खतरा रहता है। जिला प्रशासन की ओर से फिलहाल राजस्व और कृषि विभाग के अमले को सर्वे के निर्देश दिए गए हैं। किसानों ने शासन से मांग की है कि जल्द सर्वे कराकर वास्तविक नुकसान का आंकलन किया जाए और मुआवजा दिया जाए। साथ ही फसल बीमा योजना के तहत दावा प्रक्रिया सरल बनाने की भी मांग उठाई है। अब अन्नदाता की नजर आसमान पर टिकी हुई हैं। यदि जल्द मौसम साफ नहीं हुआ तो नुकसान का दायरा और बढ़ सकता है। किसानों का कहना है कि समय पर राहत नहीं मिली तो आर्थिक संकट गहराना तय है। किशोर वर्मा ems रायसेन 19/02/2026