ज़रा हटके
23-Feb-2026
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हवाई,(ईएमएस)। यूनिवर्सिटी ऑफ हवाई के वैज्ञानिकों ने सूर्य के रहस्यों को सुलझाने की दिशा में एक बड़ी कामयाबी पा ली है। शोधकर्ताओं ने सूर्य के बाहरी वायुमंडल यानी कोरोना में ऊर्जा के मूवमेंट को लेकर नए सबूत पेश किए हैं। स्टडी के लिए वैज्ञानिकों ने पूर्ण सूर्य ग्रहण जैसी दुर्लभ घटना को चुना। इंस्टीट्यूट फॉर एस्ट्रोनॉमी की शोधकर्ता के नेतृत्व में एक टीम ने 12 साल से अधिक के ऑब्जर्वेशन का विश्लेषण किया है। इस रिसर्च में पहली बार सूर्य के कोरोना में टर्बुलेंट स्ट्रक्चर्स यानी अशांत संरचनाओं की पहचान की गई है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि ये लहरें सूर्य की सतह से बहुत दूर तक अपना अस्तित्व बचाए रखती हैं। सूर्य से निकलने वाली ऊर्जा और लपटें सीधे तौर पर पृथ्वी के वातावरण और टेक्नोलॉजी को प्रभावित करती हैं। शोधकर्ता ने बताया कि यह रिसर्च हमें यह समझने में मदद करती है कि सूर्य अंतरिक्ष में ऊर्जा कैसे ट्रांसफर करता है। यह पूरी प्रक्रिया स्पेस वेदर यानी अंतरिक्ष के मौसम को प्रभावित करती है। अगर सूर्य में होने वाली ये हलचलें तेज होती हैं, तब इससे पृथ्वी पर मौजूद सैटेलाइट्स, कम्युनिकेशन नेटवर्क और पावर ग्रिड सिस्टम ठप हो सकते हैं। इन टर्बुलेंट लहरों के सोर्स को समझना बहुत जरूरी है। जब हमें पता होगा कि ये लहरें कहां से पैदा हो रही हैं, तभी हम इनके खतरों की सटीक भविष्यवाणी कर सकते है। वैज्ञानिकों के अनुसार यह खोज भविष्य में सौर तूफानों से निपटने की हमारी क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी। पूर्ण सूर्य ग्रहण के दौरान जब चंद्रमा सूर्य की चमकती डिस्क को पूरी तरह ढंक लेता है, तब कोरोना को बारीकी से देखना संभव होता है। सामान्य दिनों में सूर्य की तेज रोशनी के कारण इसके बाहरी हिस्से को देखना नामुमकिन होता है। हाई-रेजोल्यूशन वाली तस्वीरों में कोरोना के भीतर धागे जैसी पतली संरचनाएं दिखाई दी हैं, जो चुंबकीय क्षेत्रों से बनी होती हैं। वैज्ञानिकों ने इन संरचनाओं के भीतर टर्बुलेंस यानी अशांति के स्पष्ट संकेत दिखाई दिए। कुछ आकृतियां धुएं के छल्लों की तरह दिखती हैं, तब कुछ पृथ्वी पर बादलों में दिखने वाली लहरों की तरह नजर आती हैं। रिसर्च टीम ने करीब 12 साल के डेटा की तुलना की है, जिसमें एक पूरा सोलर साइकिल शामिल है। इस दौरान उन्होंने इन गतिविधियों का असली ठिकाना ‘प्रोमिनेंस’ को पाया है। प्रोमिनेंस सूर्य की सतह पर बनी बड़ी और लूप जैसी संरचनाएं होती हैं। ये अपने आसपास मौजूद लाखों डिग्री गर्म प्लाज्मा की तुलना में काफी ठंडी और घनी होती हैं। जब ये ठंडे और गर्म क्षेत्र आपस में मिलते हैं, तब तापमान और घनत्व में अचानक बदलाव आता है। यही वह स्थिति है जो अस्थिरता पैदा करती है और टर्बुलेंट मोशन को जन्म देती है। शोधकर्ता ने अपनी रिसर्च में साफ किया है कि ये अशांत संरचनाएं सूर्य के पास पैदा होने के बाद खत्म नहीं होतीं। स्पेस-बेस्ड छवि के जरिए वैज्ञानिकों ने इनका पीछा किया और पाया कि ये बहुत लंबी दूरी तय करने के बाद भी वैसी ही बनी रहती हैं। इसका मतलब है कि सूर्य से निकलने वाली सोलर विंड इन अशांत लहरों को अपने साथ पूरे सौर मंडल में ले जाती है। यह खोज इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि लंबे समय से कोरोना के गर्म होने और सोलर विंड की रफ्तार बढ़ने के पीछे टर्बुलेंस को ही मुख्य कारण माना जाता रहा है। आशीष/ईएमएस 23 फरवरी 2026