राष्ट्रीय
23-Feb-2026
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मुंबई,(ईएमएस)। देश के नामी कारोबारी अनिल अंबानी की कानूनी मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को एक फैसले में वहां अंतरिम राहत रद्द कर दी, जिसने तीन बैंकों और एक ऑडिट फर्म को उनके खिलाफ ‘फ्रॉड’ की कार्रवाई करने से रोका हुआ था। मुंबई की अदालत के फैसले के बाद बैंकों के लिए खातों को धोखाधड़ी की श्रेणी में डालने की प्रक्रिया आगे बढ़ाने का रास्ता साफ हो गया है। खंडपीठ ने दिसंबर 2025 में सिंगल बेंच द्वारा दिए गए आदेश को कानूनी रूप से त्रुटिपूर्ण बताया। अदालत ने कहा कि यदि कोई 0आदेश प्रथम दृष्टया गलत होता है, तब उस आदेश को कुछ और समय तक जारी रखना उचित नहीं होगा। अंबानी की ओर से फैसले पर चार हफ्ते की रोक लगाने की मांग भी अदालत ने खारिज की। दरअसल यहां मामला उन कारण बताओ नोटिस से जुड़ा है, जो स्टेट बैंक ऑफ इंडिया सहित बैंकों ने जारी किए थे। ऑडिट रिपोर्ट के आधार पर खातों को ‘फ्रॉड’ घोषित करने की प्रक्रिया शुरू हुई थी। लेकिन कारोबारी अनिल अंबानी ने चुनौती देकर कहा था कि कार्रवाई में प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का पालन नहीं किया गया। इसके बाद में रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने 2024 में अपने मास्टर सर्कुलर में संशोधन कर यह स्पष्ट किया था कि किसी भी खाते को ‘फ्रॉड’ घोषित करने से पहले संबंधित पक्ष को व्यक्तिगत सुनवाई का मौका देना अनिवार्य होगा। बैंकों की ओर से दलील दी गई कि ऑडिट पूरी प्रक्रिया और नियमों के तहत हुआ है और जिसमें गंभीर वित्तीय अनियमितताएं सामने आई हैं। वहीं अंबानी का कहना था कि ऑडिट करने वाली फर्म ‘बीडीओ इंडिया एलएलपी’ निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं है। उनका तर्क था कि समूह की कंपनियों के बीच हुए लेन-देन को गलत तरीके से ‘फंड डायवर्जन’ करार दिया गया। हालांकि, अब हाईकोर्ट की खंडपीठ ने सिंगल बेंच के फैसले को पलटकर बैंकों को आगे की कार्रवाई की अनुमति दे दी है। इस फैसले के बाद मामले में कानूनी लड़ाई और तेज होने के आसार हैं। आशीष दुबे / 23 फरवरी 2026