* मुख्यमंत्री के हाथों लोकार्पण; श्रील प्रभुपाद के आध्यात्मिक संघर्ष और वैश्विक प्रभाव को समर्पित है पुस्तक गांधीनगर (ईएमएस)| गांधीनगर में भारतीय आध्यात्मिकता और वैदिक ज्ञान को विश्व मंच पर प्रतिष्ठित करने वाले श्रील प्रभुपाद के प्रेरणादायी जीवन पर आधारित गुजराती जीवनचरित “विश्वगुरु श्रील प्रभुपाद” पुस्तक का आज भव्य विमोचन मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल के करकमलों से हुआ। यह पुस्तक देश के ‘आध्यात्मिक राजदूत’ कहे जाने वाले श्रील प्रभुपाद के असाधारण संघर्ष, उनकी वैश्विक आध्यात्मिक यात्रा और विश्वभर में भारतीय संस्कृति के प्रसार में उनके अमूल्य योगदान को उजागर करती है। पुस्तक विमोचन अवसर पर मुख्यमंत्री ने कहा कि श्रील प्रभुपाद का जीवन संघर्षों से भरा रहा, लेकिन भगवान श्रीकृष्ण पर उनकी अटूट आस्था ने उन्हें अद्वितीय सफलता दिलाई। उन्होंने कहा कि जब सामान्य व्यक्ति कठिनाइयों में हार मान लेता है, तब भगवद्गीता का संदेश ही जीवन को सही दिशा देता है। मुख्यमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि श्रील प्रभुपाद की 150वीं जयंती के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा स्मारक सिक्का और डाक टिकट जारी कर उनके वैश्विक प्रभाव को सम्मानित किया गया था। पुस्तक की लेखिका डॉ. उषा उपाध्याय को बधाई देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने श्रील प्रभुपाद के जीवन को गुजराती भाषा में प्रस्तुत कर उनके विचारों को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया है। उन्होंने कहा कि श्रीराम के आचरण और श्रीकृष्ण के उपदेशों को जीवन में उतारकर मोक्ष का मार्ग सरल बनाया जा सकता है। इस अवसर पर ग्लोबल हरे कृष्ण मूवमेंट के को-मेंटोर एवं वाइस चेयरमैन चंचलापति दास ने बताया कि 70 वर्ष की आयु में मात्र 40 रुपये लेकर कार्गो जहाज से अमेरिका जाकर श्रील प्रभुपाद ने ‘हरे कृष्ण’ महामंत्र को विश्वव्यापी बनाया। समुद्री यात्रा के दौरान दो बार हृदयाघात झेलने के बावजूद वे अपने गुरु की आज्ञा पालन हेतु दृढ़ रहे। उनके प्रयासों से विश्वभर में 108 से अधिक कृष्ण मंदिर स्थापित हुए। उन्होंने ‘अक्षय पात्र’ सेवा अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि वर्ष 2007 में गुजरात में इसकी शुरुआत हुई थी। आज गुजरात के पांच केंद्रों से प्रतिदिन लगभग पांच लाख बच्चों को पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है, जबकि देशभर में यह संख्या 23.5 लाख तक पहुंच चुकी है। डॉ. उषा उपाध्याय ने कहा कि श्रील प्रभुपाद का जीवन अदम्य साहस, धैर्य और मानवता के प्रति करुणा का जीवंत उदाहरण है। उन्होंने 69 वर्ष की आयु में पश्चिमी भौतिकतावादी समाज में कृष्ण भक्ति का बीज बोया और व्यसनग्रस्त युवाओं को वैदिक संस्कारों से जोड़कर नैतिक समाज निर्माण का मार्ग दिखाया। कार्यक्रम का आयोजन अहमदाबाद स्थित इस्कॉन द्वारा किया गया। इस अवसर पर शिक्षा मंत्री प्रफुल्ल पानसे, मुख्य सचिव एम. के. दास, इस्कॉन हरे कृष्ण मंदिर अहमदाबाद के अध्यक्ष जगन्मोहन कृष्ण दास सहित अनेक विद्वान, शिक्षाविद और गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। यह पुस्तक गुजरात के युवाओं से लेकर हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत सिद्ध होने की उम्मीद जताई गई। सतीश/23 फरवरी