चेन्नई (ईएमएस)। युद्धपोत आईएनएस अंजदीप को चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में नौसेना में शामिल किया जाएगा. ये युद्धपोत सबमरीन किलर होगा. यह देश का पहला युद्धपोत है जिसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशीप के तहत बनाया गया है. यानी इसमें सरकारी और प्राइवेट, दोनों निर्माता शामिल. इसका नाम आईएनएस अंजदीप है. इस युद्धपोत को चेन्नई में आयोजित एक कार्यक्रम में नौसेना में शामिल किया जाएगा. आईएनएस अंजदीप को खासतौर से दुश्मन की पनडुब्बियों से निपटने के लिए बनाया गया है. इसी वजह से इसे डॉल्फिन हंटर भी कहा जाता है. इसका मतलब असली डॉल्फिन का शिकार करना नहीं है, बल्कि पानी के अंदर तेज चलने वाली सबमरीन को पकड़ना है. यह कोई सामान्य युद्धपोत नहीं है. यह एंटी-सबमरीन वारफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट प्रोजेक्ट का हिस्सा है. आसान शब्दों में कहें तो यह जहाज समुद्र के किनारे और उथले पानी में छिपी दुश्मन पनडुब्बियों को खोजने और नष्ट करने में माहिर है. आज के तारीख में समुद्री युद्ध का बड़ा खतरा पानी के नीचे मौजूद होता है. मौका मिलते ही दुश्मन की पनडुब्बी चुपचाप हमला कर सकती है. ऐसे में यह युद्धपोत समय रहते खतरे का पता लगा कर उसे तबाह कर सकता है. इसे जहाज को कोलकाता स्थित गार्डन रीच शिप बिल्डर्स एंड इंजीनियर्स और एलएंडटी शिपयार्ड ने मिलकर तैयार किया है. यह करीब 77 मीटर लंबा है. इसकी अधिकतम रफ्तार करीब 46 किलोमीटर प्रतिघंटा है. इसमें हाई-स्पीड वॉटर-जेट सिस्टम लगा है, जिससे यह तेजी से दिशा बदल सकता है. इसकी समुद्र में रहने की क्षमता लगभग 3,333 किलोमीटर तक है. यानी ये एक बहुत बड़े एरिया पर निगरानी और शिकार कर सकता है. इस युद्धपोत को बनाने में 80% से अधिक कंपोनेंट्स देश में ही बने हैं. इसमें लगे अधिकतर उपकरण और सिस्टम भारत में ही तैयार किए गए हैं. यह दिखाता है कि भारत अब खुद अपने रक्षा उपकरण डिजाइन और तैयार करने में सक्षम होता जा रहा है. सुबोध/२६-०२-२०२६