ज़रा हटके
27-Feb-2026
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लंदन (ईएमएस)। शरीर में बहता खून न केवल आपकी सेहत का आईना है, बल्कि यह आपके लिवर के भविष्य में होने वाली बीमारियों के जोखिम का भी संकेत दे सकता है। ताजा रिसर्च में पाया गया है कि व्यक्ति का ब्लड ग्रुप यह निर्धारित करने में अहम भूमिका निभा सकता है कि भविष्य में उसे लिवर से संबंधित गंभीर बीमारियों का कितना खतरा रहेगा। खासतौर पर ब्लड ग्रुप ए वाले लोगों को अधिक सतर्क रहने की सलाह दी गई है। शोध के अनुसार, ब्लड ग्रुप ए वाले लोगों में ऑटोइम्यून लिवर डिजीज विकसित होने की संभावना अन्य ब्लड ग्रुप्स की तुलना में अधिक पाई गई है। यह ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर का इम्यून सिस्टम गलती से लिवर की स्वस्थ कोशिकाओं पर हमला करने लगता है। समय रहते पहचान न होने पर यह लिवर डैमेज और अंततः लिवर फेल्योर तक पहुंच सकती है। इसके विपरीत, ब्लड ग्रुप बी वालों के लिए यह अध्ययन राहत भरी खबर लेकर आया है। शोधकर्ताओं ने देखा कि इस ग्रुप के व्यक्तियों में लिवर की गंभीर या पुरानी बीमारियों का खतरा अपेक्षाकृत कम होता है। सांख्यिकीय रूप से इनके लिवर को अन्य ब्लड ग्रुप्स की तुलना में अधिक सुरक्षित पाया गया। रिसर्च में इस अंतर के पीछे के वैज्ञानिक कारणों को भी समझाया गया है। नॉन-ओ ब्लड ग्रुप जैसे ए, बी और एबी में क्लॉटिंग फैक्टर्स की सक्रियता अधिक होती है। इसके साथ ही इन ग्रुप्स में वॉन विलेब्रांड फैक्टर नामक प्रोटीन का स्तर भी बढ़ा हुआ पाया जाता है, जो लिवर के अंदर रक्त प्रवाह को प्रभावित कर सकता है। अध्ययन में ब्लड ग्रुप के साथ दो बीमारियों का स्पष्ट संबंध सामने आया है ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस और प्राइमरी बाइलियरी कोलांगाइटिस । एआईएच में इम्यून सिस्टम लिवर कोशिकाओं को नष्ट करने लगता है, जबकि पीबीसी में लिवर की छोटी पित्त नलिकाएं धीरे-धीरे क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। नई रिसर्च यह संकेत देती है कि ब्लड ग्रुप सिर्फ पहचान का आधार नहीं, बल्कि भविष्य की स्वास्थ्य जोखिमों का पूर्वानुमान भी हो सकता है। सुदामा/ईएमएस 27 फरवरी 2026