:: आतंकवाद का डर दिखाकर एटीएस अधिकारी बनकर बनाया बंधक; सदमे में बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ी, अस्पताल में भर्ती :: इंदौर (ईएमएस)। मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में साइबर अपराधियों ने डिजिटल अरेस्ट का खौफ दिखाकर एक बुजुर्ग दंपति से 1.15 करोड़ रुपए की सनसनीखेज ठगी को अंजाम दिया है। ठगों ने खुद को एटीएस अधिकारी बताकर दंपति को पांच दिनों तक मानसिक रूप से बंधक बनाए रखा और गिरफ्तारी का डर दिखाकर करोड़ों रुपए अलग-अलग खातों में ट्रांसफर करवा लिए। घटना के सदमे से 80 वर्षीय बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ गई, जिन्हें अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा है। हीरानगर पुलिस के अनुसार, बजरंग नगर निवासी विजय सक्सेना (80) और उनकी पत्नी सुमन (77) को 15 नवंबर 2025 को एक वीडियो कॉल आया। कॉल करने वाले ने खुद को पुणे एटीएस का अधिकारी चंद्रभान सिंह बताया। उसने दावा किया कि जम्मू के एक बैंक खाते से सुमन के नाम पर 70 लाख रुपए का संदिग्ध लेनदेन हुआ है, जिसका संबंध पुलवामा और पहलगाम में हुए आतंकी हमलों से है। आरोपियों ने जांच के नाम पर दंपति को घंटों वीडियो कॉल पर कैमरे के सामने बैठे रहने को मजबूर किया। उन्हें धमकी दी गई कि यदि उन्होंने किसी से बात की या सहयोग नहीं किया, तो उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा और उनके बच्चों की हत्या कर दी जाएगी। इसी डर के माहौल में ठगों ने दंपति के आधार कार्ड, पैन कार्ड और बैंक विवरण हासिल कर लिए। दहशत में आए दंपति ने 20 नवंबर 2025 को दो अलग-अलग खातों में कुल 1.15 करोड़ रुपए एनईएफटी के जरिए ट्रांसफर कर दिए। ठगों ने उन्हें बैंक में यह झूठ बोलने को कहा था कि वे यह पैसा अपनी बेटियों को भेज रहे हैं। इस पूरी प्रताड़ना और जीवन भर की पूंजी खोने के गम में विजय सक्सेना की तबीयत गंभीर रूप से बिगड़ गई। उनके स्वस्थ होने के बाद परिजनों को आपबीती सुनाई गई, जिसके बाद साइबर क्राइम ब्रांच में शिकायत दर्ज हुई। डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश दंडौतिया ने बताया कि हीरानगर थाने में अज्ञात आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 318 (4), 319 (2) और 308 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने नागरिकों को आगाह किया है कि पुलिस या कोई भी सरकारी एजेंसी कभी व्हाट्सएप वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट नहीं करती। किसी भी संदिग्ध कॉल आने पर तुरंत नजदीकी पुलिस स्टेशन को सूचित करें। अपनी निजी बैंकिंग जानकारी या ओटीपी किसी अनजान व्यक्ति से साझा न करें। प्रकाश/28 फरवरी 2026