वॉशिंगटन(ईएमएस)।मिडिल ईस्ट में जारी भीषण युद्ध के पहले दिन ईरान ने लगभग 350 बैलिस्टिक मिसाइलें दागकर अपनी आक्रामकता का परिचय दिया था। हालांकि, पांचवें दिन तक आते-आते यह संख्या घटकर केवल 40 मिसाइलों तक सिमट गई। यह भारी गिरावट ईरान की सैन्य रणनीति और उसके भंडार पर पड़ रहे दबाव की ओर इशारा करती है। ड्रोन हमलों के मामले में भी इसी तरह का पैटर्न देखा गया है। युद्ध के पहले दिन करीब 300 ड्रोन लॉन्च किए गए थे, जबकि दूसरे दिन यह संख्या बढ़कर 500 से अधिक हो गई थी। इसके बावजूद, पांचवें दिन ईरान केवल 45 ड्रोन ही लॉन्च कर पाया। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि हमलों की संख्या में यह कमी दो प्रमुख कारणों से हो सकती है: या तो ईरान का सक्रिय हथियार भंडार तेजी से खत्म हो रहा है, या फिर उसकी लॉन्च करने की बुनियादी क्षमता को गंभीर नुकसान पहुँचा है। रिपोर्ट में यह भी रेखांकित किया गया है कि युद्ध के पूरे सप्ताह के दौरान ईरान ने केवल 25 क्रूज़ मिसाइलें दागीं, जिसके बाद यह ग्राफ लगभग सपाट हो गया है। यानी वर्तमान में क्रूज़ मिसाइलों के हमले लगभग बंद होने की कगार पर हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह संयुक्त राज्य अमेरिका और इज़राइल द्वारा किए जा रहे निरंतर और सटीक हवाई हमले हो सकते हैं। इन जवाबी कार्रवाइयों में कथित तौर पर ईरान के मिसाइल लॉन्चर्स, ड्रोन कंट्रोल हब और ज़मीन के नीचे बने अंडरग्राउंड स्टोरेज डिपो (हथियार भंडार) को विशेष रूप से निशाना बनाया गया है। यदि ये रणनीतिक ठिकाने नष्ट हो जाते हैं, तो किसी भी सेना के लिए बड़े पैमाने पर मिसाइल और ड्रोन हमले जारी रखना अत्यंत कठिन हो जाता है। हालांकि, इन दावों की अभी तक स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं की गई है। सैन्य विशेषज्ञों ने सावधानी बरतते हुए कहा है कि ईरान के पास लंबे समय से मिसाइलों का एक विशाल भंडार होने की बात कही जाती रही है, इसलिए यह कहना जल्दबाजी होगी कि उसकी सैन्य क्षमता पूरी तरह समाप्त हो रही है। युद्ध की स्थिति में अक्सर आंकड़े बदलते रहते हैं और कई बार रणनीतिक चुप्पी को भी कमजोरी समझ लिया जाता है। फिर भी, यदि हमलों में गिरावट का यह रुझान आने वाले दिनों में भी जारी रहता है, तो मिडिल ईस्ट के युद्ध में शक्ति संतुलन पूरी तरह बदल सकता है। वीरेंद्र/ईएमएस 09 मार्च 2026