ग्वालियर ( ईएमएस ) | मितव्ययी, गुणवत्तापूर्ण एवं सर्वसुलभ शिक्षा व्यवस्था को ध्यान में रखकर कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी श्रीमती रुचिका चौहान ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता 2023 की धारा-163 के तहत अहम प्रतिबंधात्मक आदेश जारी किया है। यह आदेश कतिपय स्कूल संचालकों, प्रकाशकों एवं विक्रेताओं की एकाधिकारी प्रवृत्ति को खत्म करने तथा लोक प्रशांति विक्षुब्ध होने से रोकने के उद्देश्य से जारी किया गया है। जिला दण्डाधिकारी श्रीमती रुचिका चौहान ने आदेश में स्पष्ट किया है कि मध्यप्रदेश निजी विद्यालय (फीस तथा संबंधित विषयों पर विनियमन) अधिनियम 1917 के नियम 2020 के अनुसार निजी विद्यालयों के प्रबंधकों को विद्यालय प्रवेश प्रारंभ की तिथि एवं प्रक्रिया, विद्यालय के उपयोग में लाए जाने वाली पाठ्यपुस्तकें, स्टेशनरी, पठन सामग्री, बैग, यूनीफॉर्म, स्पोर्ट्स किट, ट्रांसपोर्ट सुविधा, फीस अथवा परीक्षा या परोक्ष एवं अपरोक्ष रूप से संग्रहित की जाने वाली धनराशि का विवरण विद्यालय के नोटिस बोर्ड अथवा आधिकारिक वेबसाइट पर प्रदर्शित करना अनिवार्य है। ऐसे विद्यालय संचालक व प्राचार्य जिन्होंने यह जानकारी वेबसाइट पर नहीं डाली है, ऐसे विद्यालय 12 मार्च 2026 तक अनिवार्य रूप से ऐसी सूची अपने विद्यालय की वेबसाइट पर अनिवार्य रूप से अपलोड कर दें। साथ ही विद्यालय परिसर में सार्वजनिक पटल स्थल पर चस्पा करना सुनिश्चित करें। मान्यता नियमों के अंतर्गत स्कूल की स्वयं की वेबसाइट होना अनिवार्य है। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि विद्यालय संचालक व प्राचार्य द्वारा विद्यार्थियों एवं अभिभावकों को पुस्तकें एवं कॉपियां, सम्पूर्ण यूनीफार्म आदि संबंधित स्कूल/संस्था अथवा किसी एक दुकान विक्रेता व संस्था विशेष से क्रय किए जाने हेतु बाध्य नहीं करेंगे। इसके साथ ही विद्यालय संचालक प्राचार्य विद्यार्थी एवं उनके अभिभावकों को सूचीबद्ध पुस्तकें परीक्षा परिणाम अथवा उनके पूर्व क्रय हेतु बाध्य नहीं करेंगे। समस्त विद्यालय पाठ्यक्रम के संबंध में नियामक संस्था/बोर्ड (सीबीएसई, आईसीएसई, एमपीबीएसई) आदि के द्वारा जारी निर्देशों का पालन करेंगे। विद्यालय संचालकों द्वारा पुस्तकों के सेट की कीमत बढ़ाने हेतु अनावश्यक सामग्री कोई निश्चित या ब्रांडेड स्कूल बैग, बोतल, पेन, पेंसिल, स्टेशनरी आदि जो निर्धारित पाठ्यक्रम से संबंधित नहीं है उसे क्रय करने हेतु बाध्य नहीं करेंगे। कोई भी विक्रेता किसी भी कक्षा के पूरे सेट को क्रय करने की बाध्यता नहीं रखेगा। विद्यालय प्रशासन शिक्षा का अधिकार अधिनियम में निर्धारित नियमानुसार यूनीफॉर्म का निर्धारण करेगी तथा एक बार निर्धारित यूनीफॉर्म को तीन वर्ष से कम समयावधि में परिवर्तित नहीं किया जायेगा। जिला दण्डाधिकारी द्वारा उक्त आदेश तत्काल प्रभाव से लागू करते हुए कहा है कि इसका उल्लंघन करने वाले व्यक्ति, संस्था, पुस्तक स्टेशनरी विक्रेता आदि के विरूद्ध भारतीय न्याय संहिता 2023 की धारा-223 एवं अन्य सुसंगत अधिनियमों के अंतर्गत कार्रवाई की जा सकेगी। विद्यालय द्वारा उक्त आदेश की अवहेलना किए जाने पर शाला के प्राचार्य/संचालक के साथ ही शाला प्रबंधक बोर्ड ऑफ डायरेक्टर के समस्त सदस्य दोषी होंगे। यह आदेश 9 मार्च से 9 मई 2026 तक की अवधि में प्रभावशील रहेगा। आदेश को विद्यालय के प्राचार्य, प्रबंधक की प्रथम बैठक में सविस्तार रखना सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। इस आदेश के तारतम्य में विशेष परिस्थितियों में अनुमति जिला दण्डाधिकारी से ली जा सकेगी।