:: श्रीनगर मेन गार्डन पर कलश यात्रा के साथ सात दिवसीय शिवपुराण कथा का शुभारंभ :: इंदौर (ईएमएस)। मन में पुण्यों का प्रवेश तभी संभव है जब पाप का निवारण हो। कलियुग में बढ़ती विसंगतियों के बीच यज्ञ, कथा और पुण्य कार्यों की प्रवृत्तियां निरंतर घट रही हैं। ऐसे में शिवपुराण जैसे धर्मग्रंथ हमारी नई पीढ़ी का न केवल मार्गदर्शन करते हैं, बल्कि उन्हें चैतन्य भी बनाते हैं। अतः हमें इनका नियमित मनन-मंथन करना चाहिए क्योंकि जैसे कर्म हम करेंगे, वैसा ही फल हमें प्राप्त होगा। शिवपुराण की कथा जीव मात्र के कल्याण का मार्ग प्रशस्त करती है। ये दिव्य विचार प्रख्यात आचार्य पं. विष्णुदत्त शर्मा महर्षि ने सोमवार को श्रीनगर मेन स्थित गार्डन में व्यक्त किए। खत्री महिला मंच एवं खत्री सभा इंदौर के तत्वावधान में आयोजित इस सात दिवसीय महाशिवपुराण कथा के शुभारंभ सत्र से पूर्व सुबह बीमा नगर स्थित गोपाल मंदिर से कथा स्थल तक एक भव्य कलश यात्रा निकाली गई। बैंड-बाजों, भजनों और गरबा मंडलियों के साथ निकली इस यात्रा में सैकड़ों महिला-पुरुष पारंपरिक परिधानों में शामिल हुए। पवित्र नदियों के जल से भरे कलश मस्तक पर धारण कर मातृशक्ति कथा स्थल पहुंची। सभा के अध्यक्ष प्रदीप बिरदी, महिला मंच की अध्यक्ष श्रीमती रीता टंडन और ममता सेठ सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने व्यास पीठ एवं शिवपुराण ग्रंथ का पूजन कर आशीर्वाद लिया। मार्ग में विभिन्न स्थानों पर शोभायात्रा का पुष्प वर्षा के साथ भव्य स्वागत किया गया। महिला मंच की प्रमुख श्रीमती रीता टंडन ने बताया कि श्रीनगर मेन स्थित गार्डन पर आयोजित यह कथा 15 मार्च तक प्रतिदिन दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक जारी रहेगी। आयोजन स्थल पर भक्तों की सुविधा के लिए बैठक, पेयजल, सफाई, सुरक्षा और पार्किंग के समुचित प्रबंध किए गए हैं। कथा के दौरान शिवलिंग पूजन विधि, भस्म एवं रुद्राक्ष महिमा, पार्वती जन्मोत्सव, शिव-पार्वती विवाह, कार्तिकेय जन्म प्रसंग, तुलसी-जालंधर कथा, शिवरात्रि व्रत कथा एवं भगवान शिव की आराधना से जुड़े विभिन्न प्रसंगों की विस्तृत व्याख्या की जाएगी। आचार्य पं. शर्मा महर्षि ने कथा के पहले दिन प्रवचन देते हुए कहा कि संसार का कोई भी जीव दुख नहीं चाहता और हर कोई सुख की अभिलाषा में जीवन भर प्रयत्नशील रहता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसार दुखों का घर है और माया के वशीभूत होकर सच्चा आनंद प्राप्त नहीं किया जा सकता। यदि जीवन में सच्चा आनंद और शांति चाहिए, तो भगवान शिव की शरण में जाना अनिवार्य है। हमारे सनातन धर्म के सभी ग्रंथ मन की ग्रंथियों को खोलने वाले हैं और शिवपुराण का स्थान इनमें सर्वोपरि माना गया है। कथा के प्रथम दिन से ही भजनों की अमृत वर्षा और भक्तों के आनंदमय नृत्य ने वातावरण को शिवमय बना दिया। प्रकाश/09 मार्च 2026 संलग्न चित्र – श्रीनगर मेन स्थित गार्डन पर सोमवार से प्रारंभ हुई शिव पुराण कथा के शुभारंभ पर निकली कलश यात्रा का दृश्य।