* मेंटेनेंस पर 56.66 करोड़ और पायलटों के वेतन पर 28.08 करोड़ खर्च; कांग्रेस विधायक खेड़ावाला ने उठाए सवाल गांधीनगर (ईएमएस)| गुजरात विधानसभा सत्र के दौरान राज्य सरकार के विमान और हेलिकॉप्टर पर हुए खर्च को लेकर बड़े आंकड़े सामने आए हैं। कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला द्वारा पूछे गए एक प्रश्न के लिखित जवाब में सरकार ने स्वीकार किया कि पिछले दो वर्षों में इन हवाई वाहनों के संचालन और रखरखाव पर करोड़ों रुपये खर्च किए गए हैं। सरकार द्वारा प्रस्तुत आंकड़ों के अनुसार, पिछले दो वर्षों में विमान और हेलिकॉप्टर पर कुल 87 करोड़ रुपये से अधिक खर्च किए गए हैं। इसमें सबसे बड़ा हिस्सा मेंटेनेंस पर खर्च हुआ है। बीते 24 महीनों में केवल रखरखाव पर ही 56 करोड़ 66 लाख रुपये खर्च किए गए। वहीं विमान और हेलिकॉप्टर उड़ाने वाले पायलटों के वेतन पर सरकार ने 28 करोड़ 8 लाख रुपये खर्च किए। इसके अलावा ग्राउंड स्टाफ और अन्य तकनीकी कर्मचारियों के वेतन व भत्तों पर 1 करोड़ 58 लाख रुपये खर्च किए गए। रिपोर्ट में सबसे चौंकाने वाली बात यह सामने आई कि 56 करोड़ रुपये से अधिक के मेंटेनेंस खर्च के बावजूद दो बार ऐसी घटनाएं हुईं, जब विमान और हेलिकॉप्टर में गंभीर तकनीकी खराबियां आ गईं। इन खराबियों के कारण उस समय सरकार इनका उपयोग नहीं कर सकी। करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जरूरत के समय विमान उपलब्ध न होने से मेंटेनेंस की गुणवत्ता पर सवाल उठने लगे हैं। कांग्रेस विधायक इमरान खेड़ावाला ने इस मुद्दे पर सरकार को घेरते हुए कहा कि जनता के पैसे का इस तरह दुरुपयोग हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब राज्य में कई बुनियादी जरूरतों के लिए बजट की कमी बताई जाती है, तब वीआईपी सुविधाओं पर इतना बड़ा खर्च और फिर भी सुविधा का अभाव चिंताजनक है। फिलहाल गुजरात सरकार के पास अपना आधुनिक विमान और हेलिकॉप्टर है, जिनका उपयोग मुख्यमंत्री और राज्यपाल जैसे वीआईपी लोगों की आवाजाही के लिए किया जाता है। इन आंकड़ों के सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है। सतीश/09 मार्च