इन्दौर (ईएमएस) जैन धर्म के प्रथम तीर्थकर 1008 भगवान आदिनाथ (ऋषभदेव) का जन्म कल्याणक महोत्सव आज पूरे देश में हर्षोल्लास और भक्तिभाव के साथ मनाया जा रहा है। संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं मयंक जैन ने बताया कि विश्व जैन संगठन एवं राष्ट्रीय जिनशासन एकता संघ के संयुक्त तत्वावधान में इस अवसर पर विशेष धार्मिक अनुष्ठानों और सामाजिक संदेशों का प्रचार प्रसार किया जा रहा है। इस पावन अवसर पर विद्वानों ने भगवान आदिनाथ द्वारा दी गई उन छह अनिवार्य शिक्षाओं (षट्कर्म) को याद किया, जिन्होंने आदि युग में मानव सभ्यता की नींव रखी थी। जब समाज व्यवस्था बदल रही थी, तब प्रभु ने प्रजा के जीवन निर्वाह के लिए निम्नलिखित कलाओं का ज्ञान दिया: असि (Sovereignty/Defense): समाज और राष्ट्र की रक्षा के लिए शस्त्र संचालन और शौर्य। मसि (Writing/Knowledge): ज्ञान के संरक्षण और शासन के लिए लेखन कला। कृषि (Agriculture): अन्न की आत्मनिर्भरता के लिए खेती का विज्ञान। विद्या/व्यापार (Trade): आर्थिक संतुलन के लिए कौशल। वाणिज्य (Commerce): वस्तुओं का आदान-प्रदान और आर्थिक शुचिता। शिल्प (Arts/Crafts): वास्तुकला, निर्माण और रचनात्मक कौशल। राष्ट्रीय जिन शासन एकता संघ एवं विश्व जैन संगठन के प्रचारक राजेश जैन दद्दू एवं अध्यक्ष मयंक जैन ने भारत वर्षीय जैन समाज से आह्वान करते निवेदन किया हैं कि भगवान ऋषभदेव के जन्म कल्याणक के शुभ अवसर पर हर घर में पाँच दीपक प्रज्वलित करें। संगठन ने इस ऐतिहासिक दिन को प्रकाश पर्व के रूप में मनाने की अपील की है। संघ के पदाधिकारियों ने समाज के प्रत्येक परिवार से आह्वान किया है कि: भगवान आदिनाथ के जन्म की खुशी में आज संध्या काल में प्रत्येक जैन परिवार अपने घर की देहरी पर 5-5 दीपक अवश्य प्रज्वलित करें। यह पाँच दीपक पंचपरमेष्ठी के प्रतीक और हमारे भीतर के अज्ञान अंधकार को मिटाने के संकल्प के परिचायक होंगे। आनंद पुरोहित/ 11 मार्च 2026