क्षेत्रीय
11-Mar-2026
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सागर (ईएमएस) । मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बुंदेलखंड के पारंपरिक खान-पान संस्कृति की सराहना करते हुए इसे सेहत के लिए भी उत्तम बताया है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से बुंदेलखंड के पारंपरिक मोटे अनाज (Millets) से बने व्यंजनों की सराहना की। उन्होंने कहा कि ज्वार, बाजरा, मक्का की रोटी न केवल ऊर्जा प्रदान करती है, बल्कि हमारी प्राचीन आहार पद्धति का गौरव भी है। - थाली में परोसा गया बुंदेलखंड का वैभव मुख्यमंत्री की थाली में बुंदेलखंड के पारंपरिक व्यंजन शामिल थे। इनमें मुख्य रूप से मेथी और चने की भाजी, कड़ी पकौड़ा, दही बड़े, पारंपरिक स्वाद के साथ बिजोरे, कचरिया, बरी की सब्जी और प्रसिद्ध महेरी, खीचला, पापड़, मंगोड़ी और गुजराती नमकीन, चिरौंजी की बर्फी, आम-नींबू का अचार और ताजगी से भरपूर आम का पना शामिल थे। उन्होंने कहा कि बुंदेली व्यंजन केवल स्वाद में ही बेमिसाल नहीं हैं, बल्कि यह पाचन की दृष्टि से भी अत्यंत लाभकारी है। ज्वार-बाजरा जैसे मोटे अनाज स्वास्थ्य का आधार हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्थानीय व्यंजनों को बढ़ावा देना ’’वोकल फॉर लोकल’’ के संकल्प को मजबूत करता है। बुंदेलखंड के ये व्यंजन इस क्षेत्र की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और मेहमाननवाजी का प्रतीक हैं। - बुंदेली कलाकारों एवं वाद्य यंत्र की प्रस्तुति की मुख्यमंत्री ने की सराहना, गले लगा थपथपाई पीठ मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सागर जिले के प्रवास के दौरान बुंदेली संस्कृति की जीवंत प्रस्तुति ने सभी का ध्यान खींच लिया। स्थानीय बुंदेली कलाकारों एवं पारंपरिक वाद्य यंत्रों की मनमोहक प्रस्तुति के साथ मुख्यमंत्री का भव्य स्वागत किया गया। कलाकारों ने राई, बधाई एवं अन्य लोक गीतों की प्रस्तुतियां दीं, जिसमें ढोलक, नगड़िया, बांसुरी, मंजीरा और अन्य पारंपरिक बुंदेली वाद्य यंत्रों की धुनें गूंज उठी। मनमोहक प्रस्तुतियों ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव का मन मोह लिया। उन्होंने कलाकारों को गले लगाया और उनकी पीठ थपथपाकर सराहना की। निखिल सोधिया/ईएमएस/11/03/2026