बालाघाट (ईएमएस). वारासिवनी के वारा में संचालित जटाशंकर पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट पर एक छात्रा ने उसकी छात्रवृत्ति राशि निकालने और गलत ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) देने का आरोप लगाया है। पीडि़त छात्रा ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर प्रशासन से मामले की जांच कर संस्थान के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं संस्थान प्रबंधन ने इन आरोपों से इंकार किया है। जानकारी के अनुसार छात्रा आस्था नगपुरे ने वर्ष 2022-23 में जटाशंकर पैरामेडिकल इंस्टीट्यूट वारा, वारासिवनी में फिजियोथेरेपी कोर्स में प्रवेश लिया था। छात्रा का आरोप है कि लगभग ढाई साल तक परीक्षा आयोजित नहीं होने के कारण उसने संस्थान से टीसी ले लिया और आगे की पढ़ाई के लिए भोपाल के एक कॉलेज में प्रवेश लेने पहुंची। लेकिन वहां संस्थान द्वारा जारी टीसी को स्वीकार नहीं किया गया, क्योंकि उसमें परीक्षा में शामिल नहीं होने का उल्लेख किया गया था। इस कारण उसे उस समय भोपाल के कॉलेज में प्रवेश नहीं मिल सका। बाद में उसने दूसरी टीसी बनवाकर कॉलेज में प्रवेश लिया। छात्रा के अनुसार उसे भोपाल के कॉलेज में प्रवेश तो मिल गया, लेकिन छात्रवृत्ति का लाभ नहीं मिल पा रहा है। छात्रवृत्ति पोर्टल पर अभी भी उसका नाम वारासिवनी के कॉलेज से जुड़ा हुआ है, जिससे वह भोपाल कॉलेज से छात्रवृत्ति के लिए आवेदन नहीं कर पा रही है। आस्था का आरोप है कि जब उसने संस्थान से पोर्टल से उसका नाम हटाने के लिए कहा तो प्रबंधन ने 56 हजार रुपये की छात्रवृत्ति राशि जमा करने की शर्त रख दी। छात्रा का कहना है कि प्रवेश के समय संस्थान ने उससे 30 हजार रुपये फीस के साथ 56 हजार रुपये की छात्रवृत्ति राशि भी पहले ही ले ली थी। छात्रा ने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर उसकी छात्रवृत्ति राशि वापस दिलाने की मांग की है। उसका कहना है कि यदि उसका नाम पोर्टल से नहीं हटाया गया तो वह भोपाल में बिना छात्रवृत्ति के अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाएगी। संस्थान प्रबंधन ने आरोपों से किया इंकार वहीं संस्थान प्रबंधक आशीष पारधी ने छात्रा के आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि प्रोफेशनल कोर्स में इस तरह की समस्याएं अक्सर सामने आती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा दी जाने वाली छात्रवृत्ति उसी संस्थान में अध्ययन के लिए दी जाती है। यदि छात्रा अन्य कॉलेज में पढ़ते हुए छात्रवृत्ति लेना चाहती है तो उसे पहले सरकार से प्राप्त छात्रवृत्ति राशि वापस करनी होगी। उन्होंने यह भी कहा कि छात्रवृत्ति सीधे छात्रा के खाते में आती है, ऐसे में संस्थान द्वारा उसकी राशि निकालने का आरोप पूरी तरह से निराधार है। भानेश साकुरे / 11 मार्च 2026