अंतर्राष्ट्रीय
12-Mar-2026


तेहरान(ईएमएस)। ईरान और अमेरिका के बीच जारी भीषण युद्ध के बीच एक ऐसी रिपोर्ट सामने आई है, जिसने अमेरिकी सेना और उसकी खुफिया एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 28 फरवरी को ईरान पर किए गए अमेरिका के पहले हमले के दौरान एक प्राथमिक स्कूल को निशाना बनाया गया था, जिसमें कम से कम 175 बच्चियों की दर्दनाक मौत हो गई थी। अब ताजा सैन्य जांच और मीडिया रिपोर्ट्स में यह खुलासा हुआ है कि यह हमला किसी दुश्मन की साजिश नहीं, बल्कि अमेरिका की एक बहुत बड़ी इंटेलिजेंस फेलियर (खुफिया विफलता) का नतीजा था। अमेरिकी अखबारों की जांच के अनुसार, शजराह तैय्येबेह प्राथमिक स्कूल की इमारत अमेरिकी टारगेट लिस्ट में शामिल थी। दरअसल, अमेरिकी सेना इसे एक सैन्य ठिकाना समझकर निशाना बना रही थी। जांच से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, इस हमले के लिए टॉमहॉक मिसाइल का इस्तेमाल किया गया था। अभी तक अमेरिका इस हमले की जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा था, लेकिन अमेरिकी सेना की आंतरिक जांच ने ही इसकी पोल खोल दी है। शुरुआती निष्कर्षों से पता चला है कि जिस समय यह हमला हुआ, अमेरिकी सेना पास में स्थित एक ईरानी सैन्य बेस को निशाना बनाना चाहती थी। यह स्कूल भवन कभी उस सैन्य बेस का हिस्सा हुआ करता था, लेकिन वर्षों पहले इसे शिक्षा संस्थान में बदल दिया गया था। खुफिया विफलता का सबसे बड़ा पहलू यह है कि अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने हमले के लिए जिन टारगेट कोऑर्डिनेट्स का इस्तेमाल किया, वे डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी द्वारा दिए गए पुराने डेटा पर आधारित थे। रिपोर्ट के मुताबिक, इस डेटा को हमले से पहले दोबारा सत्यापित नहीं किया गया, जिसके कारण मिसाइल सीधे मासूम बच्चों के स्कूल पर जा गिरी। यह त्रासदी तब हुई जब युद्ध के शुरुआती घंटों में डरे हुए माता-पिता अपने बच्चों को सुरक्षित घर ले जाने के लिए स्कूल पहुंच रहे थे। इसी दौरान दो मंजिला इमारत पर हुए धमाके ने 175 लोगों की जान ले ली, जिनमें अधिकांश छोटी बच्चियां थीं। इस मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विरोधाभासी बयानों ने जांच को और अधिक जटिल बना दिया है। एक ओर जहाँ ट्रंप ने इस हमले के लिए सार्वजनिक रूप से ईरान को ही जिम्मेदार ठहराने की कोशिश की थी, वहीं दूसरी ओर उनकी अपनी ही सेना की जांच रिपोर्ट अमेरिका की सीधी भूमिका की ओर इशारा कर रही है। अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस टारगेटिंग एरर को लेकर जवाबदेही तय करने की मांग उठ रही है। विशेषज्ञ सवाल उठा रहे हैं कि दुनिया की सबसे आधुनिक सेना ने बिना पुख्ता जानकारी के रिहायशी इलाके में इतना बड़ा हमला कैसे कर दिया। फिलहाल, इस मामले की विस्तृत जांच जारी है, लेकिन इस खुलासे ने युद्ध के मानवीय पक्ष और निर्दोषों की सुरक्षा को लेकर वैश्विक बहस छेड़ दी है। वीरेंद्र/ईएमएस/12मार्च2026 --------------------------------