दुबई(ईएमएस)। मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच जारी तनाव अब एक विनाशकारी मोड़ ले चुका है। गुरुवार को ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में अपनी सैन्य ताकत का आक्रामक प्रदर्शन करते हुए पर्शियन गल्फ में दो बड़े तेल टैंकरों पर आत्मघाती हमले किए। इन हमलों ने न केवल वैश्विक ऊर्जा बाजार में खलबली मचा दी है, बल्कि संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कुवैत जैसे देशों को भी युद्ध की सीधी चपेट में ले लिया है। सैटेलाइट तस्वीरों से पुष्टि हुई है कि ईरान ने यूएई के फुजैराह तेल क्षेत्र, शारजाह के औद्योगिक इलाके और कुवैत स्थित अल-सालेम अमेरिकी सैन्य बेस को निशाना बनाया है। गुरुवार को हुए इस बारूदी खेल में सबसे भीषण हमला इराक के क्षेत्रीय जल क्षेत्र में हुआ, जहां ईरान के अंडरवॉटर ड्रोन ने दो विदेशी तेल टैंकरों को उड़ा दिया। इनमें से एक जहाज सेफसी विष्णु अमेरिकी कंपनी का है, जबकि दूसरा जेफिरोस ग्रीस का है। इराकी अधिकारियों के अनुसार, इस हमले में चालक दल के एक सदस्य की मौत हो गई है, जबकि 38 लोगों को बचा लिया गया है। ईरान की सरकारी एजेंसियों ने गर्व से इस ऑपरेशन की जिम्मेदारी ली है, वहीं इराक ने इसे अपनी संप्रभुता का सीधा उल्लंघन करार देते हुए कड़ी चेतावनी जारी की है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, समुद्र में तेल रिसाव के कारण लपटें पानी की सतह पर फैल गई हैं, जिससे बड़े पर्यावरणीय संकट का खतरा पैदा हो गया है। युद्ध की यह लपटें अब रिहायशी इलाकों तक भी पहुंच गई हैं। दुबई के पॉश इलाके क्रीक हार्बर में एक बहुमंजिला इमारत से ईरानी ड्रोन के टकराने की घटना ने पेंटागन की नींद उड़ा दी है। हालांकि, दुबई सिविल डिफेंस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आग पर काबू पा लिया और किसी के हताहत होने की सूचना नहीं है, लेकिन शहर के बीचों-बीच हुए इस हमले ने सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान ने तेहरान के तेल ठिकानों पर हुए हालिया हमलों का बदला लेने के लिए यह आर-पार की रणनीति अपनाई है। इराक के खोर अल-जुबैर बंदरगाह के पास हुए हमलों के बाद इराक ने एहतियात के तौर पर अपने तेल बंदरगाहों का संचालन रोक दिया है। चूंकि निशाना बना एक जहाज अमेरिकी स्वामित्व वाला है, इसलिए वाशिंगटन के सीधे सैन्य हस्तक्षेप की संभावना प्रबल हो गई है। अगर यह समुद्री टकराव और बढ़ता है, तो फारस की खाड़ी से होने वाला वैश्विक व्यापार पूरी तरह ठप हो सकता है, जिससे दुनिया एक बड़े आर्थिक और ऊर्जा संकट की गर्त में गिर जाएगी। वीरेंद्र/ईएमएस/12मार्च2026 --------------------------------