कोरबा (ईएमएस) कोयलांचल क्षेत्र के कुसमुंडा से सर्वमंगला चौक तक फोरलेन सड़क बनने से शहर की ओर आवाजाही सुगम हो गई है, लेकिन इमलीछापर चौक पर रेलवे ओवरब्रिज का काम 3 साल से अटके होने की वजह से वहां पर लोगों को हलाकान होना पड़ रहा है। कुसमुंडा के इमलीछापर चौक पर रेलवे ओवरब्रिज निर्माण में बाधा बन रहे 11 मकानों को तोड़े 9 माह और बारिश को बीते 6 माह हो गए, लेकिन अब तक रुका हुआ कार्य शुरू नहीं हुआ है। अड़चन की वजह से लोगों को आवाजाही में परेशानी हो रही है। कुसमुंडा खदान से कोयला परिवहन के लिए मालवाहकों का दबाव होने और इमलीछापुर चौक के पास रेलवे फाटक के थोड़ी-थोड़ी देर के अंतराल में बंद होने की वजह से घंटों तक जाम लगा रहता है, इसलिए फोरलेन सड़क बनने के साथ ही एसईसीएल के सहयोग से इमलीछापर चौक के पास राइट्स को रेलवे ओवरब्रिज बनाने की जिम्मेदारी दी है। राइट्स ने कुसमुंडा के शिव मंदिर चौक की ओर से इमलीछापर चौक तक एक हिस्से में ओवरब्रिज का निर्माण कराया। वहीं दूसरे हिस्से में रेलवे फाटक के आगे भुट्टा चौक की ओर अंडरब्रिज व अन्य स्ट्रक्बर तैयार किया। इसके बाद इमलीछापर चौक से रेलवे फाटक के बीच 11 मकानों को निर्माण कार्य में बाधा बताकर निर्माण कार्य को रोक दिया। 2 साल से ओवरब्रिज का काम अटके होने की वजह से लगभग 9 माह पहले प्रशासन ने बारिश के बीच सख्ती के साथ उक्त मकानों को खाली कराकर ढहा दिया। ओवरब्रिज के निर्माण के लिए जमीन को मशीन लगाकर समतल भी कर दिया, लेकिन स्थिति जस की तस है। दूसरी ओर इमलीछापर चौक पर भी सड़क का काम नहीं हो सका है, जिस कारण से सड़क पर गड्ढे व कीचड़ के बीच से लोगों को आवाजाही करनी पड़ रही है। रेलवे फाटक पर घंटों फंसना या फिर घुमावदार वैकल्पिक मार्ग से होकर गुजरना पड़ रहा है। प्रशासन की लेटलतीफी के कारण लोग हलाकान हैं।कुसमुंडा के इमलीछापर चौक पर रेलवे ओवरब्रिज का निर्माण अटकने से कुसमुंडा, गेवरा, दीपका, हरदीबाजार, बांकीमोंगरा और दीगर क्षेत्रों की 2 लाख आबादी प्रभावित है। ओवरब्रिज नहीं बनने से इमलीछापर चौक से कुसमुंडा थाना की ओर जाने वाले रेलवे फाटक पर फंसकर तो गेवरा, दीपका व बांकीमोंगरा की ओर से इमलीछापर चौक होकर आवाजाही करने वाले लोग खराब सड़क के कारण परेशान है। इमलीछापर चौक पर रेलवे ओवरब्रिज और सड़क निर्माण का कार्य अटकने से कोयलांचल क्षेत्र के लोगों के 3 साल से परेशान हैं। बारिश के दौरान इमलीछापर चौक से कुचैना की ओर सड़क पर गड्डे और पानी भरने से स्थिति तालाब जैसी हो जाती है। बारिश के दौरान इसी वजह से व्यापारियों ने बड़ा आंदोलन किया था। 3 माह बाद मानसून आते ही समस्या बढ़ेगी। 13 मार्च / मित्तल