नई दिल्ली (ईएमएस)। दिल्ली के नए उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के सामने राष्ट्रीय राजधानी को वैश्विक शहर बनाने की बड़ी चुनौती है। उन्हें मास्टर प्लान 2041 लागू करने, डीडीए की परियोजनाओं को पूरा करने और वित्तीय स्थिति मजबूत करने पर ध्यान देना होगा। राष्ट्रीय राजधानी होने के बावजूद दिल्ली आज भी मूलभूत समस्याओं से जूझ रही है। स्वच्छ पेयजल, गुणवत्ता वाली शिक्षा और स्वास्थ्य के साथ ही स्वच्छता, सड़क, यातायात प्रबंधन और प्रदूषण के मामले में भी राजधानी देश के किसी दूरदराज के शहर से अलग नजर नहीं आती। ऐसे में मूलभूत समस्याओं से जूझती दिल्ली को वैश्विक शहर बनाना नए एलजी तरनजीत सिंह संधू के सामने बड़ी चुनौती होगी। दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के अध्यक्ष रूप में उनके सामने अधूरी परियोजनाओं को पूरा करने के साथ-साथ डीडीए की वित्तीय स्थिति को मजबूत बनाए रखने की भी चुनौती होगी। एलजी विनय कुमार सक्सेना के कार्यकाल मंल डीडीए का जिस तरह से कायाकल्प हुआ और एजेंसी की वित्तीय स्थिति में सुधार के साथ-साथ डीडीए के माध्यम से कई बड़ी परियोजनाओं को मूर्त रूप दिया गया, उसके बाद अब नए एलजी के सामने विकास की उस रफ्तार को कायम रखने की चुनौती होगी। खासकर, यमुना किनारे रिवरफ्रंट विकसित करने में आ रही अड़चनों को दूर करने, नरेला को एजुकेशन हब बनाने, अधूरी आवासीय परियोजनाओं को पूरा करने और नई योजनाओं को अमली जामा पहनाने, पर्यावरण और कानून व्यवस्था को सुधारने, पुरानी आवासीय सोसायटियों को पुनर्विकसित करने और मास्टर प्लान 2041 को जल्द से जल्द लागू करने जैसी चुनौतियां भी सामने होंगी। संधू दिल्ली के दूसरे सिख एलजी हैं। उनसे पहले वायुसेना के मार्शल अर्जन सिंह 1989-90 में दिल्ली के उपराज्यपाल रहे थे। संधू की नियुक्ति को दिल्ली के सिख समुदाय के लिए भी काफी अहम माना जा रहा है। अजीत झा/देवेन्द्र/नई दिल्ली/ईएमएस/13/मार्च/2026