इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में जस्टिस विजय कुमार शुक्ला और जस्टिस आलोक अवस्थी की युगलपीठ ने महू स्थित 159 वर्ष पुरानी आर्मी स्कूल की बिल्डिंग को तोड़ने पर लगी रोक हटाने से इंकार करते सुनवाई हेतु अगली तारीख 26 मार्च नियत की। बता दें कि महू के आर्मी स्कूल की यह बिल्डिग 1866 में बनी थी। सेना इसे तोड़कर इसकी जगह पर नई बिल्डिंग बनाने की तैयारी कर रही है। इस इमारत को बचाने के लिए हाईकोर्ट में जनहित याचिका देव कुमार वासुदेवन ने अधिवक्ता अभिनव धनोतकर के जरिए दायर की है। जिसमें कोर्ट को बताया गया कि यह बिल्डिंग ऐतिहासिक महत्व रखती है, बनने के बाद पहले लंबे समय तक इसमें आर्मी अस्पताल चलता रहा था। बाद में इसका आर्मी पब्लिक स्कूल के रूप में उपयोग होने लगा। इसे संरक्षित किया जाना चाहिए। याचिका सुनवाई दौरान केंद्र सरकार की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल और डिप्टी सॉलिसिटर जनरल इस बिल्डिंग के खतरनाक स्थिति में होने की बात कहकर हाईकोर्ट द्वारा इसे तोड़ने पर लगी पाबंदी को खत्म करने की मांग कोर्ट से करते रहे। कल फिर सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट में पेश केंद्र सरकार के वकीलों ने दलील दी कि राष्ट्रपति के आदेश के बाद में बिल्डिंग का रिकंस्ट्रक्शन का काम किया जा रहा है। आसपास में अन्य बिल्डिंग का काम चल रहा है। बिल्डिंग पुरानी होने से खतरनाक हो चुकी है। स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे खेलते हुए उस ओर चले जाते हैं, जिसके कारण दुर्घटना का खतरा रहता है। बिल्डिंग को तोड़ने पर लगी रोक खत्म की जाए। इसके पहले सरकारी वकील कोर्ट में कहते रहे हैं कि बिल्डिंग पुरातात्विक धरोहरों में भी शामिल नहीं है। ऐसे में इसे तोड़ने पर किसी तरह की पाबंदी नहीं है। हालांकि कोर्ट ने कोर्ट ने पिछली सुनवाई पर पुरातत्व, अभिलेखागार और संग्रहालय निदेशालय से उसकी रिपोर्ट तलब की थी। वहीं याचिकाकर्ता के वकील धानोतकर ने कोर्ट में पुरातत्व विभाग के डिप्टी डायरेक्टर द्वारा 2 नवंबर 2023 को जारी किए गए एक पत्र का हवाला दिया, जिसमें इस बिल्डिंग को ब्रिटिश वास्तुकला का उदाहरण बताया था। इस दौरान केंद्र सरकार के वकीलों ने आपत्ति ली कि पुरातत्व विभाग के उपनिदेशक को इस तरह की चिट्ठी जारी करने का कोई अधिकार ही नहीं है। फिलहाल कोर्ट ने इसे तोड़ने पर लगीं रोक हटाने से इंकार करते सुनवाई की अगली तारीख 26 मार्च नियत कर दी है। आनंद पुरोहित/ 13 मार्च 2026