- जमा, निकासी और एटीएम जैसी बुनियादी सुविधाएं बिना किसी अतिरिक्त शुल्क के मिलेगी नई दिल्ली (ईएमएस)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने संसद में बताया कि भारत में लगभग 72 करोड़ बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट (बीएसबीडीए) हैं, जिनमें न्यूनतम बैलेंस की कोई बाध्यता नहीं है। इनमें प्रधानमंत्री जन धन योजना (पीएमजेडीवाय) के तहत खोले गए खाते भी शामिल हैं। इन खातों में जमा, निकासी और एटीएम जैसी बुनियादी सुविधाएं बिना किसी अतिरिक्त शुल्क उपलब्ध हैं। इसका उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग, छोटे जमाकर्ताओं और उन लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ना है जो अब तक इन सुविधाओं से दूर थे। जहां जीरो बैलेंस खातों पर राहत है, वहीं सामान्य बचत और चालू खातों में मासिक औसत बैलेंस बनाए रखना जरूरी है। यदि ग्राहक ऐसा नहीं करते हैं, तो बैंक उचित और पारदर्शी शुल्क लगा सकते हैं। वित्तीय वर्ष 2022-23 से 2024-25 के बीच सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने मिनिमम बैलेंस न रखने वाले ग्राहकों से 8,092.83 करोड़ रुपये वसूले। यह राशि बैंकों की कुल कमाई का केवल 0.3 प्रतिशत है और इसका उद्देश्य मुनाफा कमाना नहीं बल्कि सेवाओं के खर्च को संतुलित करना है। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने मार्च 2020 में बचत खातों पर मिनिमम बैलेंस शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया था। इसी राह पर चलते हुए 2025 तक 9 अन्य सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों ने भी जुर्माने हटा दिए या उनमें भारी कटौती की। यह कदम बैंकिंग सेवाओं को ग्राहक-केंद्रित और संवेदनशील बनाने की दिशा में उठाया गया। सतीश मोरे/13मार्च ---