- सूक्ष्म वित्त क्षेत्र के परिपक्व होने के साथ ही विविधीकरण की प्रवृत्ति में और तेजी की संभावना नई दिल्ली (ईएमएस)। सूक्ष्म वित्त संस्थान (एमएफआईएस) बाहरी दबावों के कारण मुख्य रूप से परिसंपत्ति गुणवत्ता से जुड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि सामाजिक-राजनीतिक माहौल और राज्यों के कड़े नियम जैसे पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, बिहार, असम और कर्नाटक में जबरन वसूली पर रोक ने इन संस्थानों को अपनी रणनीतियों में बदलाव के लिए प्रेरित किया है। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) द्वारा कुल परिसंपत्तियों पर 60 प्रतिशत तक पात्रता मानदंड में ढील देने के बाद, सूक्ष्म वित्त संस्थान अब सुरक्षित ऋण उत्पादों पर अधिक ध्यान दे रहे हैं। इन उत्पादों में स्वर्ण ऋण, गृह सुधार ऋण, वाहन ऋण और संपत्ति के बदले ऋण शामिल हैं। अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के आंकड़ों के अनुसार क्रेडिट एक्सेस ग्रामीण, सैटिन क्रेडिटकेयर, स्पंदना स्फूर्ति जैसी संस्थाओं ने अपने पारंपरिक सूक्ष्म ऋणों में कमी की है। यह कदम जोखिम कम करने और नए क्षेत्रों में विस्तार करने की दिशा में एक रणनीतिक बदलाव को दर्शाता है। सूक्ष्म वित्त संस्थान अब एमएसएमई ऋण, एलएपी, किफायती आवास वित्त और वाहन ऋण जैसे क्षेत्रों में तेजी से विस्तार कर रहे हैं। सैटिन क्रेडिटकेयर नेटवर्क के एक अधिकारी ने कहा कि सूक्ष्म वित्त क्षेत्र के परिपक्व होने के साथ ही विविधीकरण की प्रवृत्ति में और तेजी आने की संभावना है। उन्होंने बताया कि एमएफआईएस के संचित स्वामित्व (एयूएम) में 10–15 प्रतिशत की वृद्धि अपेक्षित है, जबकि सहायक कंपनियों में 40–50 प्रतिशत की तेजी देखी जा रही है। सतीश मोरे/13मार्च ---