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13-Mar-2026


- सरकार ने एमएसएमई क्षेत्र को समर्थन देने के लिए कई योजनाएं चलाई नई दिल्ली (ईएमएस)। केंद्रीय एमएसएमई मंत्री जीतन राम मांझी ने संसद में बताया कि 2020 से 28 फरवरी, 2026 तक करीब 7.83 करोड़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) पंजीकृत हुए हैं। इन उद्यमों से 34.50 करोड़ रोजगार के अवसर पैदा हुए। इस अवधि में लगभग 1.37 लाख उद्यम बंद हुए, जिनमें मालिक बदलना, दोहरा पंजीकरण, प्रमाण पत्र की आवश्यकता न होना या व्यवसाय बंद होना मुख्य कारण रहे। सरकार ने एमएसएमई क्षेत्र को समर्थन देने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं, जिनमें प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी), सूक्ष्म एवं लघु उद्यम ऋण गारंटी योजना, एमएसएमई क्लस्टर विकास कार्यक्रम, एसआरआई कोष, प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना और एमएसएमई चैंपियंस योजना शामिल हैं। इन योजनाओं के माध्यम से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों में सहयोग किया जाता है। कोविड-19 महामारी के समय व्यवसायों को समर्थन देने के लिए 5 लाख करोड़ रुपए की आपातकालीन ऋण गारंटी योजना लागू की गई। यह योजना 31 मार्च, 2023 तक रही, जिसमें 1.13 करोड़ एमएसएमई को गारंटी दी गई। स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 14.6 लाख खाते बचाए गए, जिनमें 98.3 प्रतिशत सूक्ष्म और लघु उद्यम थे। पीएमईजीपी के लाभार्थियों में 39 प्रतिशत महिलाएं हैं। महिलाओं को गैर-विशेष श्रेणी की तुलना में अधिक सब्सिडी (35 फीसदी) दी जाती है। इसके अलावा, एमएसएमई की स्थिति में सुधार होने पर तीन वर्षों के लिए गैर-कर लाभ भी प्रदान किए गए हैं। आत्मनिर्भर भारत (एसआरआई) कोष के माध्यम से 50,000 करोड़ रुपए का निवेश किया गया, जिसमें सरकार 10,000 करोड़ और निजी इक्विटी/वेंचर कैपिटल 40,000 करोड़ का योगदान कर रही है। इसका उद्देश्य एमएसएमई को विकास पूंजी उपलब्ध कराना है। सतीश मोरे/13मार्च ---