व्यापार
13-Mar-2026


- भू-राजनीतिक संकट का असर, एटमा ने सरकार से समर्थन की मांग की नई दिल्ली (ईएमएस)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने भारतीय टायर उद्योग की चिंता बढ़ा दी है। ऑटोमोबाइल टायर मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (एटमा) ने सरकार को चेतावनी दी है कि खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष से टायर निर्यात प्रभावित हो सकता है। एटमा के अनुसार होर्मुज स्ट्रेट और स्वेज नहर जैसे प्रमुख समुद्री मार्गों में अस्थिरता यूरोप, अमेरिका और अफ्रीका को होने वाली खेपों में देरी और ढुलाई लागत में बढ़ोतरी कर सकती है। भारत पश्चिम एशिया को सालाना लगभग 25-26 करोड़ डॉलर के टायर निर्यात करता है। यदि तनाव बढ़ता रहा, तो इन खेपों में व्यवधान आ सकता है। एटमा ने यह भी कहा कि निर्यात में अनिश्चितताओं के कारण भारतीय टायर उद्योग की अंतरराष्ट्रीय प्रतिस्पर्धी क्षमता कमजोर हो सकती है। टायर उत्पादन में कच्चे तेल से बने उत्पादों का 60-70 प्रतिशत हिस्सा होता है। प्रमुख इनपुट में सिंथेटिक रबर, कार्बन ब्लैक, प्रोसेसिंग ऑयल और टायर कॉर्ड फैब्रिक शामिल हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव (लगभग 100 डॉलर प्रति बैरल) सीधे उत्पादन लागत बढ़ा रहे हैं। इस कारण माल ढुलाई और लॉजिस्टिक बाधाओं का सामना करना पड़ सकता है। एटमा के एक व‎रिष्ठ अ‎धिकारी ने कहा कि बढ़ती उत्पादन लागत, निर्यात अनिश्चितताएं और ढुलाई में रुकावट का मिला-जुला असर उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि समय पर नीतिगत समर्थन जरूरी है ताकि भारत की निर्यात गति बनी रहे और अंतरराष्ट्रीय बाजार में उसका प्रभाव बनाए रखा जा सके। सतीश मोरे/13मार्च ---