बेंगलुरु (ईएमएस)। राज्यसभा चुनाव से पहले ओडिशा की राजनीति में हलचल तेज है। क्रॉस वोटिंग की आशंका के बीच कांग्रेस ने अपने आठ विधायकों को बेंगलुरु भेज दिया है। कांग्रेस पार्टी नेताओं का कहना है कि विधायकों को संभावित ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ से बचाने के लिए यह कदम उठाया है। कांग्रेस विधायक दल के नेता रामचंद्र कदम ने कहा कि पार्टी के आठ विधायक बेंगलुरु के बाहरी इलाके में एक रिसॉर्ट में ठहराए गए हैं। उन्होंने कहा, हमारे विधायकों को बीजेपी की ओर से संभावित खरीद-फरोख्त के प्रयासों से बचाने के लिए उन्हें होटल में रखा गया है। उन्होंने बताया कि ओडिशा कांग्रेस के सभी विधायक एकजुट हैं। कांग्रेस के जिन विधायकों को बेंगलुरु भेजा गया है, उसमें पार्टी के चीफ व्हिप सीएस राजेन एक्का, प्रफुल्ल प्रधान, मंगु खिला, अशोक दास, पवित्र साउंता, राजन एक्का और कद्रका अप्पाला स्वामी शामिल हैं। पार्टी सूत्रों के अनुसार, चार और विधायक शनिवार सुबह तक बेंगलुरु पहुंच सकते हैं। सूत्रों का कहना है कि इन विधायकों की वापसी सोमवार को भुवनेश्वर में होगी और वे सीधे विधानसभा पहुंचकर राज्यसभा चुनाव में दत्तेश्वर होता के पक्ष में मतदान करने वाले है। होता को बीजद ने उम्मीदवार बनाया है और कांग्रेस उनका समर्थन कर रही है। उधर, मुख्य विपक्षी दल बीजद ने भी अपने सभी विधायकों को सतर्क रहने को कह दिया हैं। पार्टी प्रमुख और पूर्व सीएम नवीन पटनायक ने अपने आवास ‘नवीन निवास’ पर विधायकों की प्राथमिक बैठक बुलाई है। इस बीच कांग्रेस की विधायक सोफिया फिरदौस ने कहा कि उन्हें विधायकों के बेंगलुरु जाने की जानकारी नहीं है और उन्हें कहीं जाने की जरूरत नहीं है। बात दें कि ओडिशा से राज्यसभा की चार सीटों के लिए 16 मार्च को चुनाव होना है और कुल पांच उम्मीदवार मैदान में हैं। 147 सदस्यीय विधानसभा में बीजद के पास 48 विधायक हैं, जबकि भाजपा के पास 79 विधायक और तीन निर्दलीयों का समर्थन है। भाजपा ने अपने प्रदेश अध्यक्ष मनमोहन सामल और मौजूदा सांसद सुजीत कुमार को उम्मीदवार बनाया है, जबकि पार्टी ने निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय का समर्थन किया है। बीजद ने संत्रुप्त मिश्रा और दत्तेश्वर होता को उम्मीदवार बनाया है, जिसमें से होता को कांग्रेस का समर्थन मिला है। माना जा रहा है कि चौथी सीट के लिए असली मुकाबला राय और दत्तेश्वर होता के बीच है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, कांग्रेस और बीजद का साथ आना ओडिशा की राजनीति में अहम संकेत माना जा रहा है, क्योंकि 26 साल पहले बीजद ने कांग्रेस को सत्ता से बाहर कर दिया था और तब से दोनों दल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। आशीष दुबे / 13 मार्च 2026