नई दिल्ली,(ईएमएस)। बंगाल की राजधानी कोलकाता में पॉलिटिकल कंसल्टेंसी फर्म आई-पैक के ऑफिस और उसके को-फाउंडर प्रतीक जैन के घर पर रेड मामले में दाखिल प्रवर्तन निदेशालय की याचिका पर पश्चिम बंगाल की ममता सरकार ने सवाल खड़े किए हैं। ईडी की याचिका में दावा किया गया है कि रेड के वक्त मुख्यमंत्री ममता बनर्जी आला पुलिस अधिकारियों के साथ पहुंचीं और छापेमारी में बाधा डालकर सबूत नष्ट किए। याचिका में रेड में बाधा डालने और सबूत नष्ट करने पर ममता और सीनियर पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सीबीआई जांच की मांग की गई है। इस याचिका पर बुधवार को बंगाल सरकार के वकील श्याम दीवान ने कहा कि ईडी अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल नहीं कर सकती है, यह अनुच्छेद मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए है और ईडी कोई व्यक्ति नहीं है इसलिए उसके मौलिक अधिकार नहीं हो सकते। वकील दीवान ने कहा कि क्या ईडी अनुच्छेद 32 के तहत याचिका दाखिल कर सकती है, यह एक संवैधानिक प्रश्न है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 145 के तहत इसतरह के मामलों की सुनवाई करीब 5 जजों की बेंच में होनी चाहिए। इस पर ईडी की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि बंगाल सरकार खुद आर्टिकल 32 के तहत रिट पिटीशन दाखिल कर चुकी है और केरल सरकार भी ऐसा कर चुकी है। इन्होंने राज्य के तौर पर याचिका दाखिल की थी। बात दें कि इस मामले में ईडी का आरोप है कि 8 जनवरी 2026 को कोयला घोटाले से जुड़े मामले में जब वे आई-पैक के दफ्तर में छापेमारी कर रहे थे, तब ममता बनर्जी ने हस्तक्षेप किया, सबूतों को गायब किया और उनके काम में बाधा डाली। इस मामले में ईडी ने सुप्रीम कोर्ट से ममता और बंगाल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर सीबीआई जांच की मांग की है। जबकि ममता सरकार ने दलील दी कि ईडी की याचिका दुर्भावनापूर्ण है और इसका उद्देश्य 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी को निशाना बनाना है। राज्य सरकार के वकील श्याम दीवान ने तर्क दिया कि क्या कोई केंद्रीय एजेंसी अनुच्छेद 32 के तहत रिट याचिका दायर कर सकती है, और इस मामले को 5 जजों की संवैधानिक बेंच के पास भेजा जाना चाहिए। आशीष दुबे / 18 मार्च 2026