- कोर्ट अन्य पक्ष आपत्तियों के बाद लेगी सुनवाई निर्णय, अगली तारीख 2 अप्रैल इन्दौर (ईएमएस) मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय खंडपीठ इन्दौर में चल रही धार भोजशाला विवाद मामले की सुनवाई में एक जनहित याचिका जैन समाज की ओर से दिल्ली निवासी सलेकचंद जैन द्वारा दायर की गई है जिसमें दावा किया गया है कि भोजशाला मंदिर, मस्जिद नहीं बल्कि जैन समाज का गुरुकुल था इसमें सभी धर्म के बच्चे पढ़ने आते थे। जैन धर्म की प्राकृत भाषा का संस्कृत में अनुवाद भी भोजशाला में होता था। यहां आदिनाथ भगवान का मंदिर भी था। यहां से नेमीनाथ भगवान की मूर्ति भी निकली है, जो 22वें तीर्थंकर है। भोजशाला में जैन धर्म से संबंधित कुछ अन्य चिह्न भी निकले हैं। याचिका में बताया गया कि पुरातत्व विभाग के सर्वे में मिली मूर्तियां जैन तीर्थंकरों की हैं। ब्रिटिश म्यूजियम में जो मूर्ति है, वह जैन धर्म की देवी अंबिका की है, वाग्देवी (सरस्वती) की नहीं। भोजशाला में एएसआइ के वैज्ञानिक सर्वे में भी बहुत सी मूर्तियां निकली हैं, ये मूर्तियां भी जैन धर्म से संबंधित हैं। इस पर सुनवाई दौरान भारतीय पुरातत्व सर्वे (एएसआई) ने इसका विरोध करते हुए कहा कि यह याचिका सुनवाई योग्य ही नहीं है। एएसआई ने कोर्ट को बताया कि पूर्व में भी इसी तरह की याचिका जैन समाज की ओर से प्रस्तुत की गई थी, जिसे कोर्ट निरस्त कर चुका है। इस याचिका को भी निरस्त किया जाए। इब पर कोर्ट ने एएसआई को कहा कि आपको जो भी कहना है वह लिखित में दें। कोर्ट 2 अप्रैल को यह तय करेगी कि इस याचिका पर सुनवाई आगे जारी रखी जाए या नहीं। कल इस जनहित याचिका पर सुनवाई दौरान कोर्ट में याचिकाकर्ता की और से एडवोकेट दिनेश राजधर, एएसआइ की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता सुनील जैन, शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी ने उपस्थित होकर अपने तर्क रखे। बता दें कि याचिकाकर्ता सलकचंद जैन द्वारा पूर्व में इसी मुद्दे पर लगाई याचिका कोर्ट ने निर्धारित प्रारूप में नहीं होने से निरस्त कर दी थी परन्तु कोर्ट ने तब याचिकाकर्ता को यह स्वतंत्रता दी थी कि वे चाहें तो याचिका निर्धारित प्रारूप में तैयार कर दोबारा प्रस्तुत कर सकते हैं। इसके चलते ही याचिका पुनः लगाई गई है जिस पर अन्य पक्षों की आपत्तियां बाद कोर्ट 2 अप्रैल को यह निर्णय देगी कि याचिका पर सुनवाई जारी रखी जाएं कि नहीं। आनंद पुरोहित/ 21 मार्च 2026