कांकेर(ईएमएस)। शहर के कृषि उपज मंडी परिसर में आयोजित शादी-ब्याह और अन्य कार्यक्रमों के बाद फैलने वाली गंदगी ने सफाई व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कार्यक्रम समाप्त होते ही जूठन, डिस्पोजल और अन्य अपशिष्ट खुले में फेंक दिए जाते हैं, जो कई दिनों तक वहीं पड़े रहते हैं। इससे परिसर में दुर्गंध फैल रही है और आसपास के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। हाल ही में आयोजित एक शादी समारोह के बाद दूसरे दिन तक भी परिसर में कचरा बिखरा हुआ नजर आया। प्लास्टिक प्लेट, गिलास और बचा हुआ भोजन खुले में पड़ा रहा। जबकि मंडी प्रशासन आयोजन के लिए प्रतिदिन 2000 रुपए शुल्क वसूल करता है, इसके बावजूद सफाई व्यवस्था सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। मंडी प्रशासन का कहना है कि नियमों के तहत आयोजनकर्ताओं को पहले ही बता दिया जाता है कि कार्यक्रम के बाद सफाई की जिम्मेदारी उन्हीं की होगी। लेकिन जमीनी स्थिति यह है कि न तो आयोजक समय पर सफाई कराते हैं और न ही मंडी कर्मचारी इसकी निगरानी करते हैं, जिससे गंदगी कई दिनों तक बनी रहती है। मंडी परिसर के पास स्थित वेयरहाउस के कर्मचारियों ने भी समस्या उठाई है। उनका कहना है कि खुले में पड़ा कचरा हवा के साथ वेयरहाउस तक पहुंचता है, जिससे बदबू और अस्वच्छता के कारण काम करना मुश्किल हो जाता है। सबसे चिंताजनक बात यह है कि खुले में फेंकी गई जूठन और डिस्पोजल सामग्री को खाकर मवेशी बीमार पड़ रहे हैं। फरवरी माह में दो मवेशियों की मौत भी इसी कारण होने की बात सामने आई है। स्थानीय नागरिक विजय तिवारी और कमलेश कुमार ने बताया कि बदबू कई बार मंडी परिसर से बाहर तक फैल जाती है, जिससे आसपास के वार्डवासियों को भी परेशानी होती है। इस पूरे मामले में सवाल उठ रहा है कि जब आयोजन के लिए शुल्क लिया जा रहा है, तो सफाई की जवाबदेही तय क्यों नहीं की जा रही। इस संबंध में कृषि उपज मंडी सचिव एनआर मार्कण्डेय ने कहा कि जिन लोगों के पास बड़े आयोजन के लिए पर्याप्त जगह नहीं होती, उन्हें सुविधा के तौर पर मंडी परिसर उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि नियमों के अनुसार सफाई की जिम्मेदारी आयोजकों की ही होती है और उन्हें ही गंदगी हटाकर परिसर साफ करना होता है। ईएमएस(राकेश गुप्ता)21 मार्च 2026