ग्वालियर ( ईएमएस ) | मप्र चैंबर ऑफ कॉमर्स का एक प्रतिनिधिमंडल ने आज मुरार सर्किट हाउस में प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट से मुलाकात कर केवल ग्वालियर में ही FAR के लिए 1.5 FAR से अधिक उपयोग करने पर कलेक्टर गाइड लाइन का 50% शुल्क नगर निगम को राजस्व के रूप में देने का केवल ग्वालियर में ही प्रावधान रखे जाने की ओर ध्यान आकर्षित करवाते हुए ज्ञापन सौंपा प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि ग्वालियर में पिछले लगभग तीन वर्षों से एक भी बहुमंजिला भवन को स्वीकृति नहीं मिल पाई है। ‘मास्टर प्लान’ में हुई त्रुटियों के कारण लगभग 2000 करोड़ रुपये से अधिक के रियल एस्टेट प्रोजेक्ट लंबे समय से अटके हुए हैं, जिससे न केवल व्यवसाय प्रभावित हुआ है बल्कि शासन के राजस्व को भी भारी क्षति पहुंच रही है। प्रतिनिधिमंडल ने यह भी अवगत कराया कि ग्वालियर की आर्थिक परिस्थितियां पहले से ही महानगरों की तुलना में अपेक्षाकृत कमजोर हैं, ऐसे में इस प्रकार की प्रशासनिक त्रुटियों और इसको जानबूझकर विलंब करने की मंशा का सीधा असर व्यापारिक गतिविधियों पर पड़ रहा है। प्रभारी मंत्री तुलसीराम सिलावट ने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए प्रतिनिधिमंडल को आश्वस्त किया कि “ग्वालियर के साथ अन्य नहीं होने दिया जाएगा। संबंधित अधिकारियों से शीघ्र चर्चा कर इस समस्या का निराकरण कराया जाएगा उन्होंने कहा कि व्यापारिक और औद्योगिक विकास में कोई भी बाधा है तो उसे शीघ्र दूर किया जाए यह मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव की स्पष्ट मंशा है इसलिए मुख्यमंत्री जी से भी इस विषय में बात कर इसको दूर करने के लिए उचित कदम उठाने का आग्रह किया जाएगा । चैंबर के प्रतिनिधिमंडल में अध्यक्ष डॉ. प्रवीण अग्रवाल, मानसेवी सचिव दीपक अग्रवाल, कोषाध्यक्ष संदीप नारायण अग्रवाल, क्रेड़ाई के अध्यक्ष सुदर्शन झवर एवं आशीष प्रताप सिंह राठौर शामिल थे।