23-Mar-2026
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- निस्वार्थ प्रेम और त्याग का संदेश बिलासपुर (ईएमएस)। ‘रामायण का आध्यात्मिक महत्व एवं जीवन प्रबंधन’ श्रृंखला के तीसरे दिन का केंद्र भगवान राम के अनुज भरत के आदर्श चरित्र पर रहा। वक्ता मंजू दीदी ने अयोध्या कांड का उल्लेख करते हुए बताया कि भरत निस्वार्थ प्रेम, त्याग और उच्च संस्कारों की अनुपम मिसाल हैं। उन्होंने कहा कि जब भरत को राज्य प्राप्त करने का अवसर मिला, तब उन्होंने इसे ठुकरा दिया। उनके लिए सत्ता से अधिक महत्वपूर्ण उनके बड़े भाई राम थे, जिन्हें वे धर्म, मर्यादा और सत्य का प्रतीक मानते थे। दीदी ने बताया कि भरत का प्रेम केवल भावनात्मक नहीं, बल्कि गहरे आध्यात्मिक स्तर का था। सत्र में राम, सीता और लक्ष्मण के प्रतीकात्मक महत्व को भी समझाया गया—राम को विवेक, सीता को पवित्रता और लक्ष्मण को त्याग का प्रतीक बताया गया। राम-भरत मिलाप का प्रसंग भावुक वातावरण में प्रस्तुत किया गया, जहां भरत ने सिंहासन स्वीकारने के बजाय राम की चरण पादुकाओं को राजगद्दी पर स्थापित कर स्वयं को सेवक रूप में रखा। मंजू दीदी ने स्वभाव प्रबंधन पर जोर देते हुए कहा कि विनम्रता, धैर्य, कृतज्ञता और वफादारी जैसे गुण ही व्यक्ति को महान बनाते हैं। उन्होंने ‘नो कंप्लेन, नो पेन’ का संदेश देते हुए जीवन में सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने की प्रेरणा दी। कार्यक्रम के अंत में श्रद्धालुओं से भरत के आदर्शों को जीवन में अपनाने का आह्वान किया गया तथा भोग वितरण किया गया। मनोज राज 23 मार्च 2026