राष्ट्रीय
28-Mar-2026
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नई दिल्ली(ईएमएस)। भारत की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए सात विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है, जो म्यांमार के विद्रोही गुटों को आतंकी प्रशिक्षण और आधुनिक हथियार मुहैया कराने की साजिश रच रहे थे। इस संवेदनशील मामले पर स्थिति स्पष्ट करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि गिरफ्तार किए गए इन विदेशी नागरिकों से भारत की आंतरिक सुरक्षा को कोई प्रत्यक्ष खतरा नहीं था। उन्होंने बताया कि ये लोग भारत का इस्तेमाल केवल एक ट्रांजिट पॉइंट के रूप में कर रहे थे ताकि मिजोरम के रास्ते म्यांमार पहुंचकर वहां सक्रिय विद्रोही शिविरों तक जा सकें। गृह मंत्री ने सरकार की नीति स्पष्ट करते हुए कहा कि भले ही इनका मुख्य लक्ष्य म्यांमार था, लेकिन यदि कोई विदेशी नागरिक गलत इरादे से भारतीय भूमि का उपयोग करता है, तो उसे बख्शा नहीं जाएगा। इसके साथ ही, उन्होंने नक्सलवाद के खात्मे पर सरकार की रणनीति साझा करते हुए कहा कि 31 मार्च, 2026 तक नक्सली हमलों और बम विस्फोटों पर पूरी तरह रोक लगाने का लक्ष्य है। उन्होंने जोर दिया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में अब आदिवासी क्षेत्रों में विकास कार्यों के माध्यम से सुरक्षा सुनिश्चित की जा रही है। पकड़े गए समूह में एक अमेरिकी नागरिक मैथ्यू आरोन वान डाइक और छह यूक्रेनी नागरिक—हुरबा पेट्रो, सिल्वियाक तारास, इवान सुकमानोवस्की, स्टीफंकिव मैरियन, होनचारुक मक्सिम और कामिन्स्की विक्टर शामिल हैं। इनकी गिरफ्तारी कोलकाता, लखनऊ और दिल्ली जैसे प्रमुख शहरों से की गई है। जांच में सामने आया कि ये लोग वैध वीजा पर भारत आए थे, लेकिन मिजोरम जैसे संरक्षित क्षेत्रों में प्रवेश के लिए आवश्यक एडवांस परमिट न होने के कारण सुरक्षा एजेंसियों की रडार पर आ गए। इन विदेशी नागरिकों पर बेहद गंभीर आरोप हैं। एनआईए के अनुसार, ये आरोपी यूरोप से भारी मात्रा में ड्रोन की खेप लेकर आए थे और म्यांमार के जातीय विद्रोही गुटों को हथियार व सैन्य प्रशिक्षण देने के सीधे संपर्क में थे। ये गुट भारत के प्रतिबंधित विद्रोही समूहों से भी जुड़े हुए हैं। इन सभी के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां रोकथाम अधिनियम (यूएपीए) की धारा 18 और भारतीय न्याय संहिता के तहत मामला दर्ज किया गया है। नई दिल्ली की विशेष एनआईए अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए सभी सात आरोपियों की कस्टडी 10 दिनों के लिए और बढ़ा दी है। अदालत का मानना है कि राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े इस मामले में गहन पूछताछ अनिवार्य है, क्योंकि जांच के दौरान कुछ और संदिग्ध भारतीयों और विदेशियों के नाम भी सामने आए हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/28मार्च2026 --------------------------------