राष्ट्रीय
28-Mar-2026
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कोलकाता,(ईएमएस)। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव की तारीखों के नजदीक आते ही राज्य में राजनीतिक सरगर्मियां और चुनावी हिंसा को लेकर तनाव चरम पर पहुंच गया है। भारत निर्वाचन आयोग ने निष्पक्ष चुनाव सुनिश्चित करने के लिए कड़े कदम उठाते हुए एक तरफ मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के विवादित भाषण पर रिपोर्ट तलब की है, वहीं दूसरी तरफ कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में एक पुलिस इंस्पेक्टर को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। राज्य में दो चरणों में 23 अप्रैल और 29 अप्रैल को मतदान होना है, जिसके परिणाम 4 मई को घोषित किए जाएंगे। निर्वाचन आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के उस भाषण पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है, जो उन्होंने दार्जिलिंग के नक्सलबाड़ी स्थित एक जनसभा के दौरान दिया था। आरोप है कि मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल के जवानों को कथित तौर पर धमकाया। वीडियो साक्ष्यों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि उन्होंने महिलाओं और लड़कियों से मतदान केंद्रों पर डटे रहने को कहा और जरूरत पड़ने पर किसी भी स्थिति से निपटने के लिए घरेलू रसोई के उपकरणों का इस्तेमाल करने की बात कही। आयोग इस मामले में आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन के पहलुओं की जांच कर रहा है। समानांतर कार्रवाई करते हुए, चुनाव आयोग ने दक्षिण 24 परगना जिले के बासंती पुलिस स्टेशन के प्रभारी इंस्पेक्टर अविजित पॉल को निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई 26 मार्च को बासंती बाजार इलाके में हुई हिंसक घटना के बाद की गई है। आयोग के अनुसार, भाजपा उम्मीदवार विकास सरदार के चुनाव प्रचार के दौरान हुई इस हिंसा में पुलिसकर्मी और कई अन्य लोग घायल हुए थे। आयोग ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि पर्याप्त केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल की उपलब्धता के बावजूद इंस्पेक्टर ने सुरक्षा की मांग नहीं की और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में पूरी तरह विफल रहे, जो ड्यूटी में गंभीर कोताही को दर्शाता है। इस घटनाक्रम पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप भी तेज हो गए हैं। भाजपा सांसद बिप्लब कुमार देब ने इस हमले को सुनियोजित बताते हुए राज्य सरकार और तृणमूल कांग्रेस पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने दावा किया कि ज्ञात हमलावरों ने पार्टी कार्यकर्ताओं और बीच-बचाव करने आए सुरक्षा बलों को निशाना बनाया। देब ने राज्य में हिंसा के माहौल के लिए सीधे तौर पर मुख्यमंत्री को जिम्मेदार ठहराया। हालांकि, सत्तारूढ़ दल इन आरोपों को चुनावी हथकंडा बता रहा है। फिलहाल, चुनाव आयोग की इन सख्त कार्रवाइयों ने स्पष्ट कर दिया है कि चुनाव के दौरान किसी भी प्रकार की हिंसा या भड़काऊ बयानबाजी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वीरेंद्र/ईएमएस/28मार्च2026 --------------------------------