लेख
28-Mar-2026
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अमेरिका में ट्रंप का बढ़ता विरोध अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अब अलग-थलग पडते चले जा रहे हैं। उन्होंने बिना संसद की अनुमति लिए ईरान के ऊपर हमला कर दिया। अभी तक वह इस हमले का कोई कारण अमेरिका की संसद को नहीं बता पा रहे हैं। इस युद्ध में अमेरिका को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध के खर्चे के लिए अतिरिक्त राशि की मांग़ की है। इतनी बड़ी राशि उन्हें क्यों चाहिए है, वह संसद को नहीं बता पा रहे हैं। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी रिपब्लिकन पार्टी के सांसदों को ब्रीफिंग के लिए बुलाया था। उसमें वह अपने ही सांसदों की बातों का जवाब नहीं दे पाए। जिसके कारण सांसदों ने बैठक के दौरान ही अपनी नाराजी जाहिर की। कुछ सांसद गुस्से में बैठक से बाहर निकल आए, उन्होंने ट्रंप के प्रति अपनी नाराजी सार्वजनिक रूप से जिस तरह जाहिर की है, उससे ऐसा लगता है, डोनाल्ड ट्रंप का विरोध रिपब्लिकन पार्टी में भी बड़ी तेजी के साथ बढ़ता चला जा रहा है। उन्हीं की पार्टी के सांसदों ने उन्हें पागल बताते हुए उनके बयानों की बड़ी आलोचना की। जिस तरह के मनमाने वह निर्णय ले रहे हैं, उसका अब रिपब्लिकन सांसद भी विरोध कर रहे हैं। सांसदों का कहना था, कि डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध नहीं लड़ने की घोषणा के साथ राष्ट्रपति पद का चुनाव लड़ा था। शांति स्थापित करना चाहते थे। अब खुद ही युद्ध में अमेरिका को झोंक दिया है। अमेरिका में महंगाई बढ़ रही है। निम्न एवं मध्यम वर्ग में ट्रंप को लेकर नाराजी स्पष्ट रूप से देखने को मिल रही है। बढ़ते खर्च के कारण अमेरिका की जनता को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। अमेरिका के ऊपर कर्ज बढ़ता चला जा रहा है। अमेरिका का राजस्व पूर्व के वर्षों की तुलना में कम हो रहा है। युद्ध में लगातार जिस तरह से खर्च हो रहा है, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप नई-नई मांग कर रहे हैं। इसको लेकर रिपब्लिकन सांसद भी नाराज हैं। टैरिफ को लेकर भी उन्होंने नाटो और अमेरिका के मित्र देशों के साथ-साथ सारी दुनिया के बड़े-बड़े देशों को नाराज कर अमेरिका के खिलाफ एकजुट कर दिया है। ईरान से युद्ध लड़ने के लिए उन्होंने नाटो और मित्र देशों को धमकाया है। उसके कारण अमेरिका बिल्कुल अलग-थलग पड गया है। इजराइल के साथ मिलकर ईरान से जो युद्ध शुरू किया है वह अमेरिका के लिए भारी साबित हो रहा है। खाड़ी के जिन देशों में अमेरिका के सैन्य अड्डे थे, ईरान ने ड्रोन और मिसाइल के जरिए उन अड्डों और वहां के सैन्य संसाधनों को पूरी तरह से नष्ट कर दिया है। अमेरिका के जंगी जहाज और सबसे ताकतवर विमानो को ईरान ने भारी नुकसान पहुंचाया है। अमेरिका के सैन्य हथियारों को इसके पहले कभी इस तरह की चुनौती नहीं मिली थी, जो अब मिल रही है। ऐसी तबाही इसके पहले अमेरिका की कभी नहीं हुई ,जो पिछले एक माह में देखने को मिली है। इसके कारण अमेरिका में ट्रंप के खिलाफ नाराजी बढ़ती चली जा रही है। आम जनता और डेमोक्रेटिक पहले से ही ट्रंप से नाराज हैं। अब रिपब्लिकन पार्टी के सांसद भी ट्रंप से नाराज हो गए हैं। अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप की लोकप्रियता मात्र 36 फीसदी रह गई है। वर्तमान स्थिति को देखते हुए लग रहा है राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान से लड़ते-लड़ते अन्य कई देशों के निशाने पर भी आ गए हैं। उन्हें अपनी कुर्सी बचाने के लिए अमेरिका में अपनों के साथ संघर्ष करना पड़ रहा है। ट्रंप जिस तरह से बयान दे रहे हैं, उन बयानों को देखते हुए अब सारी दुनिया उन्हें साइको अथवा पागल की तरह देख रही है। अमेरिका का सर्वोच्च कमांडर युद्ध के दौरान इस तरह की हरकत करेगा, यह किसी ने सोचा नहीं था। ट्रंप के पागलपन और अहंकार का खामियाजा पूरे अमेरिका को भुगतना पड़ रहा है। राष्ट्रपति ट्रंप के फैसलों से सारी दुनियां के देशों में आर्थिक संकट के साथ ही गैस और तेल का संकट उठ खड़ा हुआ है। सुरक्षा पर भी सवाल उठ रहे हैं, जिससे अधिकांश देशों के लोग परेशान है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यह कहा जाने लगा है जो हालात सोवियत रूस के विघटन के समय थी वही स्थिति आज अमेरिका में देखने को मिल रही है। अब देखना यह है कि अमेरिका की संसद कैसे डोनाल्ड ट्रंप को नियंत्रित करती है। डोनाल्ड ट्रंप के रहते क्या एक नया इतिहास अमेरिका लिखने जा रहा है। इसकी चर्चा सारी दुनिया में हो रही है। एसजे/ 28 मार्च /2026