राष्ट्रीय
29-Mar-2026


नई दिल्ली(ईएमएस)। संसद की एक स्थायी समिति ने केंद्र सरकार को सुझाव दिया है कि महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के तहत मजदूरी के भुगतान के लिए आधार-आधारित पेमेंट सिस्टम को अनिवार्य के बजाय वैकल्पिक बनाया जाए। समिति ने सरकार से आग्रह किया है कि मजदूरों के लिए भुगतान के अन्य आसान विकल्प भी उपलब्ध कराए जाने चाहिए ताकि किसी भी पात्र लाभार्थी को उसकी मेहनत की कमाई से वंचित न होना पड़े। उल्लेखनीय है कि ग्रामीण विकास मंत्रालय ने जनवरी 2024 से मनरेगा के तहत इस प्रणाली को अनिवार्य कर दिया था। सरकार का तर्क रहा है कि आधार-आधारित भुगतान से लीकेज रोकने और सीधे लाभार्थी के खाते में फंड ट्रांसफर सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। इससे पहले मजदूरी का भुगतान नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस के माध्यम से इलेक्ट्रॉनिक रूप में किया जाता था। ग्रामीण विकास और पंचायती राज पर बनी संसदीय स्थायी समिति ने अपनी ताजा रिपोर्ट में सिफारिश की है कि सरकार को वापस एनएसीएच या अन्य सरल विकल्पों पर जाने की प्रक्रिया को सुगम बनाना चाहिए। समिति ने विशेष रूप से उन बुजुर्ग मजदूरों और दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की समस्याओं पर ध्यान आकर्षित किया है, जहां इंटरनेट की कमी या शारीरिक कारणों से बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन (अंगूठे का निशान) के सफल होने की दर काफी कम है। समिति का मानना है कि तकनीकी बाधाएं किसी गरीब की मजदूरी में रुकावट नहीं बननी चाहिए। वीरेंद्र/ईएमएस/29मार्च2026