-बंगाल में सत्ता पर नजर, असम में मुस्लिम एकजुट हुए तो बढ़ सकती है मुश्किल नई दिल्ली,(ईएमएस)। आगामी दिनों में देश के चार राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश में होने वाले विधानसभा चुनाव बीजेपी के लिए बड़ी राजनीतिक परीक्षा होंगे। पश्चिम बंगाल, असम, तमिलनाडु, केरल और पुडुचेरी में पार्टी की रणनीति और प्रदर्शन पर उसकी भविष्य की राजनीतिक दिशा निर्भर करेगी। पश्चिम बंगाल में मुख्य मुकाबला टीएमसी और बीजेपी के बीच माना जा रहा है। सीएम ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली टीएमसी को चुनौती देने के लिए बीजेपी 5फीसदी वोट स्विंग पर नजर रखे हुए है। विश्लेषकों के मुताबिक यदि बीजेपी टीएमसी के वोट बैंक में मामूली सेंध लगाने में सफल रहती है, तो वह राज्य में सबसे बड़ी पार्टी बन सकती है। वहीं असम में बीजेपी हैट्रिक की कोशिश में है, लेकिन यहां 34फीसदी मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यदि यह वोट बैंक भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस और ऑल इंडिया यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बीच बंटा, तो बीजेपी को लाभ मिल सकता है, जबकि एकजुटता की स्थिति में मुकाबला कड़ा हो जाएगा। वहीं दक्षिण भारत में तमिलनाडु में बीजेपी क्षेत्रीय दलों के दबदबे के बीच अपनी जगह मजबूत करने की कोशिश कर रही है। यहां द्रविड़ मुनेत्र कड़गम और अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम का वर्चस्व है। बीजेपी का फोकस खुद को एक मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित करने पर है। वहीं केरल में पार्टी के लिए चुनौती और भी बड़ी है, जहां पारंपरिक रूप से लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट और यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट के बीच सत्ता का मुकाबला होता रहा है। बीजेपी यहां अपने वोट शेयर और सीटें बढ़ाकर ‘किंगमेकर’ की भूमिका में आने की रणनीति बना रही है। रिपोर्ट के मुताबिक पुडुचेरी में बीजेपी गठबंधन सरकार को बरकरार रखने की कोशिश कर रही है। यहां क्षेत्रीय दलों के साथ मिलकर पार्टी दक्षिण भारत में अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का संदेश देना चाहती है। कुल मिलाकर इन चुनावों में बीजेपी के लिए केवल जीत-हार ही नहीं, बल्कि नए क्षेत्रों में विस्तार, गठबंधन राजनीति और वोट बैंक को मजबूत करने की चुनौती है। अब देखना है कि यह चुनाव बीजेपी को किस मुकाम पर पहुंचाते हैं। सिराज/ईएमएस 30मार्च26