इस्लामाबाद,(ईएमएस)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को कम करने के लिए पाकिस्तान की मध्यस्थता की कोशिशों को बड़ा झटका लगा है। इस्लामाबाद में आयोजित विदेश मंत्रियों की अहम बैठक बिना किसी ठोस नतीजे के समाप्त हो गई। यह बैठक 29–30 मार्च को दो दिनों तक चली थी, लेकिन यह एक ही दिन में खत्म हो गई। सम्मेलन में तु्र्की, सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्रियों ने हिस्सा लिया। हालांकि कूटनीतिक सूत्रों के मुताबिक बैठक में किसी ठोस रोडमैप या कार्ययोजना पर सहमति नहीं बन सकी। इसकी सबसे बड़ी बाधा ईरान की सख्त शर्तें रहीं, सूत्रों का कहना है कि बैठक में शामिल किसी भी देश ने ईरान की मुख्य चिंताओं को दूर करने को लेकर कोई ठोस भरोसा नहीं जताया। जिस बैठक का उद्देश्य इस युद्ध को खत्म कराने के लिए समझौता कराना था, वहां वक्त से पहले खत्म हो गई। इसका असर यह हुआ कि सऊदी अरब और मिस्र के विदेश मंत्री 29 मार्च को ही बैठक छोड़कर रवाना हो गए, जिससे सम्मेलन तय समय से पहले ही खत्म हुआ। इन देशों का मानना था कि किसी भी प्रस्ताव को आगे बढ़ाने से पहले सीधे अमेरिका से चर्चा जरूरी है। खासतौर पर सऊदी अरब ने पाकिस्तान और तुर्की के इस दावे का पूरी तरह समर्थन करने में हिचक दिखाई कि वे अमेरिका और ईरान के बीच सफल मध्यस्थता कर सकते हैं। बैठक का अहम निष्कर्ष यह भी रहा कि पाकिस्तान और तुर्की अब ईरान से संपर्क कर उसे अपनी शर्तों में नरमी लाने के लिए राजी करने की कोशिश कर सकते हैं। ईरान अब तक अपने पिछले अनुभवों को देखकर ठोस गारंटी की मांग पर अड़ा हुआ है। हालांकि कोई ठोस नतीजा नहीं निकलने के बावजूद सभी देशों ने बातचीत जारी रखने और कूटनीतिक संपर्क बनाए रखने पर सहमति जाहिर की है, ताकि क्षेत्र में तनाव को कम किया जा सके। आशीष दुबे / 30 मार्च 2026