क्षेत्रीय
30-Mar-2026
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- ग्राम सभा की अनुमति बिना किए गए नए समझौते पर कोर्ट ने सवाल उठाए - अगली सुनवाई तक स्थिति यथावत, अंतिम फैसला बाद में होगा बिलासपुर (ईएमएस)। छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय ने रेत खदान लीज से जुड़े एक महत्वपूर्ण मामले में हस्तक्षेप करते हुए विवादित लीज समझौतों के क्रियान्वयन पर अंतरिम रोक लगा दी है। कोर्ट ने प्रथम दृष्टया याचिकाकर्ता के पक्ष में मामला बनता हुआ मानते हुए यह राहत प्रदान की। यह याचिका जे.पी. एसोसिएट्स द्वारा अधिवक्ता सिद्धार्थ पाण्डेय के माध्यम से दायर की गई थी, जिसमें ग्राम पंचायत मलाकदोल द्वारा किए गए नए लीज समझौतों को चुनौती दी गई। ग्राम सभा की स्वीकृति बिना लीज, पहले से मौजूद थी वैध अनुबंध याचिका में बताया गया कि ग्राम पंचायत मलाकदोल ने 11 अप्रैल 2025 और 24 नवंबर 2025 को नए लीज समझौते किए, जबकि याचिकाकर्ता के पक्ष में पहले से 30 जून 2023 को 5 वर्ष के लिए वैध लीज अनुबंध प्रभावी था। याचिकाकर्ता का आरोप है कि नए समझौते ग्राम सभा की स्वीकृति के बिना किए गए, जो कि कानूनी और संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन है। साथ ही, इन नए अनुबंधों के जरिए पूर्व लीज को बिना वैधानिक प्रक्रिया के समाप्त करने का प्रयास किया गया। खनन कार्य से वंचित कर आर्थिक नुकसान का आरोप याचिकाकर्ता ने कोर्ट में यह भी दलील दी कि नए लीज समझौतों के चलते उन्हें रेत खनन कार्य से वंचित कर दिया गया, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। मामले की सुनवाई के दौरान न्यायालय ने इन तर्कों को गंभीरता से लेते हुए अंतरिम आदेश पारित किया और दोनों विवादित तिथियों (11 अप्रैल 2025 एवं 24 नवंबर 2025) के लीज समझौतों के प्रभाव एवं क्रियान्वयन पर रोक लगा दी। अंतिम निर्णय याचिका के निपटारे के बाद, अगली सुनवाई तय हाईकोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह अंतरिम राहत है और अंतिम निर्णय याचिका के पूर्ण निपटारे के बाद ही लिया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी, जिसमें सभी पक्षों की दलीलों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। मनोज राज 30 मार्च 2026