नई दिल्ली (ईएमएस)। ईरान-अमेरिका जंग के कारण पूरी दुनिया में फैली अशांति को लेकर दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ इंडिया में एक सेमिनार किया गया। इस सेमिनार में अंतरराष्ट्रीय कानून पर भी चर्चा हुई। साथ ही नागरिकों की सुरक्षा भी अहम मुद्दा था। सुप्रीम कोर्ट के वकील संजय हेगड़े ने कहा कि वैश्विक व्यवस्था इस बात पर निर्भर करती है कि शक्तिशाली देश संयम और जिम्मेदारी के साथ बर्ताव करें। उन्होंने कहा कि ईरान पर इजरायल‑अमेरिका का हमला संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 2(4) और अंतरराष्ट्रीय मानवीय कानून के नियमों का उल्लंघन करता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान के खिलाफ पूर्व‑निवारक युद्ध (प्री‑एम्प्टिव वॉर) अंतरराष्ट्रीय कानून के तहत अनुमेय नहीं है। प्रो. श्रीनिवास ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानूनी मानकों के आधार पर इस युद्ध को सही ठहराना कठिन है। उन्होंने कहा कि अनुच्छेद 2(4) का सबसे अधिक उल्लंघन पश्चिमी देशों ने किया है और इसके बावजूद अंतरराष्ट्रीय कानून कमजोर देशों के लिए अपनी बात रखने और जवाबदेही तय करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम बना हुआ है। सेमिनार में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर एडवोकेट संजय हेगड़े, साउथ एशिया यूनिवर्सिटी के प्रो. श्रीनिवास बुर्रा, वरिष्ठ पत्रकार कमर आगा, ईरानी दूतावास में सांस्कृतिक परामर्शदाता डॉ। फरीदोद्दीन फरीदासर, रिटायर्ड मेजर जनरल बिशंबर दयाल और ईरानी सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह मुजताब के भारत में उप-प्रतिनिधि डॉ. मोहम्मद हुसैन जियाईनिया भी शामिल थे। सुबोध/३०-०३-२०२६