* पीएम मोदी ने किया ‘सम्राट संप्रति म्यूज़ियम’ का लोकार्पण, जैन विरासत को मिला वैश्विक मंच * तीन लाख से अधिक प्राचीन हस्तलिपियों का संरक्षण, ‘ज्ञान भारतम मिशन’ से विरासत को मिलेगा नया जीवन गांधीनगर (ईएमएस)| गांधीनगर के कोबा स्थित श्री महावीर जैन आराधना केंद्र में भगवान महावीर जन्म कल्याणक के पावन अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के करकमलों से विश्वस्तरीय ‘सम्राट संप्रति म्यूजियम’ का भव्य लोकार्पण किया गया। इस अवसर पर राष्ट्र संत जैनाचार्य श्री पद्मसागर सूरीश्वरजी, राज्यपाल आचार्य देवव्रतजी, मुख्यमंत्री भूपेन्द्र पटेल तथा अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित रहे। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि कोबा जैन तीर्थ वर्षों से अध्ययन, साधना और आत्म-अनुशासन की परंपराओं का केंद्र रहा है। यहां मूल्यों का संरक्षण, संस्कारों का संवर्धन और ज्ञान का पोषण—ये तीनों मिलकर भारतीय सभ्यता की मजबूत नींव बनाते हैं। उन्होंने कहा कि यह म्यूजियम जैन दर्शन, भारतीय संस्कृति और प्राचीन विरासत का जीवंत केंद्र है, जो आने वाली पीढ़ियों को प्रेरणा देता रहेगा। सम्राट संप्रति के ऐतिहासिक महत्व का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वे केवल एक राजा नहीं थे, बल्कि भारत के दर्शन और ज्ञान परंपरा को जोड़ने वाले सेतु थे। म्यूजियम की सात गैलरियां भारत की सांस्कृतिक विविधता और समृद्धि को दर्शाती हैं, जिनमें नवपद, तीर्थंकरों के उपदेश और जैन दर्शन को कलात्मक रूप में प्रस्तुत किया गया है। साथ ही वैदिक, बौद्ध और अन्य धार्मिक परंपराओं का भी समावेश किया गया है। प्रधानमंत्री ने वैश्विक स्तर पर शांति और मानवता के संदेश को फैलाने में इस संग्रहालय की भूमिका को महत्वपूर्ण बताया और दुनिया भर के विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों से यहां आने का आह्वान किया। उन्होंने तक्षशिला और नालंदा जैसे प्राचीन विश्वविद्यालयों का उल्लेख करते हुए कहा कि विदेशी आक्रमणों के बावजूद आम लोगों ने हस्तलिपियों को संरक्षित रखा। जैनाचार्य पद्मसागर सूरीश्वरजी द्वारा 60 वर्षों में एकत्रित तीन लाख से अधिक प्राचीन हस्तलिपियां इस म्यूजियम में सुरक्षित रखी गई हैं। सरकार द्वारा ‘ज्ञान भारतम मिशन’ के माध्यम से इन धरोहरों के डिजिटलीकरण, संरक्षण और आर्काइविंग का कार्य किया जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत अपनी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण के लिए मंदिरों के पुनरुद्धार, तीर्थ विकास, योग और आयुर्वेद के प्रचार जैसे अनेक स्तरों पर कार्य कर रहा है। उन्होंने लोथल में बन रहे विश्वस्तरीय म्यूजियम, वडनगर और दिल्ली में प्रस्तावित ‘युगे युगीन भारत म्यूजियम’ का भी उल्लेख किया। अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि भगवान महावीर के जन्मदिवस पर कोबा का यह कार्यक्रम जड़ों से जुड़ने का प्रतीक है, जबकि साणंद में आधुनिक सेमीकंडक्टर तकनीक भारत को वैश्विक स्तर पर नई पहचान दे रही है। सतीश/31 मार्च