राष्ट्रीय
03-Apr-2026


-गिरफ्तार ओटी टेक्नीशियन राजेश और कुलदीप ने पुलिस पूछताछ में खोले राज कानपुर,(ईएमएस)। कानपुर में सामने आए किडनी ट्रांसप्लांट कांड में अब एक-एक कर ऐसे राज खुल रहे हैं जो हैरान कर रहे हैं। गाजियाबाद से गिरफ्तार ओटी टेक्नीशियन राजेश कुमार और उसके साथी कुलदीप से पूछताछ में पुलिस को इस पूरे नेटवर्क के बारे में जानकारी मिली। दोनों ने बताया कि यह कोई एक-दो लोगों का काम नहीं था, पूरी तरह संगठित टीम इसमें शामिल थी। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक पूछताछ में सामने आया कि एक डॉक्टर, जिसे वे ‘डॉ. रोहित’ के नाम से जानते थे, एनेस्थीसिया का काम संभालता था यानी मरीज को बेहोश करना उसकी जिम्मेदारी थी। इसके बाद दिल्ली के द्वारका से आने वाला एक अन्य डॉक्टर ‘डॉ. अली’ सर्जरी करता था। पूरी टीम तय समय पर पहुंचती, ऑपरेशन करती और फिर अलग-अलग गाड़ियों से रवाना होती थी। एक गाड़ी गाजियाबाद की ओर जाती, तो दूसरी लखनऊ के लिए निकलती। इस तरीके से उनकी ट्रैकिंग करना पुलिस के लिए मुश्किल था। राजेश कुमार ने पुलिस को बताया कि करीब तीन साल पहले उसकी मुलाकात डॉ. रोहित से एक मेडिकल सेमिनार में हुई थी1 वहीं से इस नेटवर्क की शुरुआत मानी जा रही है। राजेश की तकनीकी समझ और काम करने के तरीके से प्रभावित होकर रोहित ने उसे अपने साथ काम करने का प्रस्ताव दिया। धीरे-धीरे कुलदीप सिंह राघव भी इस चेन में जुड़ गया और फिर यह पूरा नेटवर्क सक्रिय हो गया। राजेश के मुताबिक जनवरी से अब तक पांच किडनी ट्रांसप्लांट किए जा चुके हैं। इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाला खुलासा उस अस्पताल को लेकर हुआ, जहां ऑपरेशन किए जाते थे। जानकारी के मुताबिक ऑपरेशन शुरू होने से ठीक पहले अस्पताल के सीसीटीवी कैमरे बंद कर दिए जाते थे। इससे साफ है कि इस नेटवर्क ने पहले से ही हर कदम की प्लानिंग कर रखी थी, ताकि कोई सबूत न बचे। पुलिस ने जब उन टैक्सी ड्राइवरों से पूछताछ की, जो डॉक्टरों को लाते-ले जाते थे, तो एक और चौंकाने वाली बात सामने आई। ड्राइवरों ने बताया कि डॉक्टर अपने चेहरे को इस तरह ढक लेते थे कि उनकी पहचान करना मुश्किल था। गाजियाबाद जाने वाली गाड़ी का किराया नकद दिया जाता था, जिससे उसकी ट्रैकिंग मुश्किल हो जाती थी। वहीं लखनऊ जाने वाली गाड़ी का भुगतान ऑनलाइन होता था, जिससे पुलिस को कुछ अहम सुराग मिले हैं। इन्हीं सुरागों के आधार पर अब जांच आगे बढ़ाई जा रही है। जांच में आशंका जताई जा रही है कि इस नेटवर्क से जुड़े डॉक्टर किसी बड़े और नामी अस्पतालों से जुड़े हो सकते हैं। पुलिस इस एंगल पर भी काम कर रही है कि कहीं यह सिर्फ एक लोकल गैंग नहीं, बल्कि कई शहरों में फैला बड़ा रैकेट तो नहीं। फिलहाल इस मामले में सबसे बड़ी चुनौती फरार डॉक्टरों तक पहुंचना है। पुलिस ने लखनऊ, गाजियाबाद, मेरठ और देहरादून में अपनी टीमें भेजी हैं, जो लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही हैं। चार मुख्य डॉक्टरों के खिलाफ लुकआउट नोटिस जारी किया गया है। पुलिस को शक है कि ये आरोपी देश छोड़कर भागने की कोशिश कर सकते हैं। पूरे मामले की कड़ी फिलहाल ‘डॉ. रोहित’ पर टिकी है। वही इस नेटवर्क की मुख्य कड़ी है, जिसने बाकी डॉक्टरों और टेक्नीशियनों को जोड़ा, लेकिन रोहित फरार है, जब तक वह गिरफ्तार नहीं होता, तब तक इस पूरे नेटवर्क की पूरी तस्वीर सामने आना मुश्किल है। डीसीपी पश्चिम एसएम कासिम आबिदी के मुताबिक, पुलिस लगातार दबिश दे रही है और जल्द ही इस मामले में बड़ा खुलासा हो सकता है। उन्होंने बताया कि कई अहम सुराग हाथ लगे हैं और जांच तेजी से आगे बढ़ रही है। सिराज/ईएमएस 03अप्रैल26