वॉशिंगटन(ईएमएस)। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोमवार को व्हाइट हाउस में एक प्रेस ब्रीफिंग के दौरान ईरान में गिरे एफ-15ई स्ट्राइक ईगल फाइटर जेट के क्रू मेंबर्स को बचाने के लिए चलाए गए एक ऐतिहासिक और जोखिम भरे रेस्क्यू ऑपरेशन का ब्योरा साझा किया। राष्ट्रपति ने इसे अमेरिकी सैन्य इतिहास की सबसे साहसी कार्रवाइयों में से एक बताते हुए कहा कि इस मिशन में कुल 170 से ज्यादा सैन्य विमानों ने हिस्सा लिया। इस घटना की शुरुआत पिछले शुक्रवार को हुई, जब ईरान के दक्षिण-पश्चिमी इलाके में अमेरिकी वायुसेना का फाइटर जेट दुर्घटनाग्रस्त हो गया। जेट में सवार पायलट और वेपन्स सिस्टम ऑफिसर ने इजेक्ट कर अपनी जान बचाई, लेकिन दोनों ईरानी क्षेत्र में अलग-अलग स्थानों पर उतरे। पायलट को तो तुरंत बचा लिया गया, लेकिन कर्नल रैंक के अफसरों को सुरक्षित निकालने के लिए अमेरिका को अपनी पूरी ताकत झोंकनी पड़ी। राष्ट्रपति ट्रंप के अनुसार, पहले रेस्क्यू मिशन में पायलट को निकालने के लिए 21 विमान शामिल किए गए, जिसमें जॉली ग्रीन2 हेलिकॉप्टर की भूमिका अहम रही। इस दौरान ईरानी सेना की गोलीबारी में एक हेलिकॉप्टर को कई गोलियां लगीं, लेकिन क्रू सुरक्षित निकलने में सफल रहा। असली चुनौती दूसरे मिशन में थी, जहां घायल अफसरों को बचाने के लिए 155 विमानों का बेड़ा तैनात किया गया। इसमें 4 बॉम्बर, 64 फाइटर जेट्स और 48 रिफ्यूलिंग टैंकर शामिल थे। घायल होने के बावजूद लगभग 48 घंटे तक पहाड़ियों और दरारों में छिपे रहे और ईरानी बलों को चकमा देते रहे। ट्रंप ने भावुक होते हुए कहा, घायल अवस्था में 48 घंटे तक दुश्मन की जमीन पर डटे रहना एक अद्भुत वीरता है। इंटेलिजेंस डायरेक्टर जॉन रैटक्लिफ ने बताया कि इस नो-फेल मिशन की सफलता के पीछे सीआईए का एक बड़ा डिसेप्शन कैंपेन (भ्रामक अभियान) था। खुफिया एजेंसी ने ऐसी अफवाहें और तकनीक इस्तेमाल की जिससे ईरानी सैनिक भटक गए, जबकि पहाड़ों में सुरक्षित छिपे रहे। रैटक्लिफ ने कहा कि इस ऑपरेशन की सफलता से ईरानी सेना अब शर्मिंदगी महसूस कर रही है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अंत में जोर देकर कहा कि अमेरिकी सेना कभी अपने सैनिकों को पीछे नहीं छोड़ती। उन्होंने इस मिशन को अमेरिकी सैन्य शक्ति और अटूट समन्वय का बेजोड़ उदाहरण बताया। फिलहाल घायल कर्नल सुरक्षित हैं और उनका इलाज जारी है। वीरेंद्र/ईएमएस/07अप्रैल2026