राष्ट्रीय
09-Apr-2026


हैदराबाद (ईएमएस)। तेलंगाना हाई कोर्ट ने कांग्रेस नेता पवन खेड़ा की उस याचिका पर अपना आदेश सुरक्षित रख लिया, जिसमें उन्होंने असम पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज मामले में गिरफ्तारी से अंतरिम सुरक्षा की मांग की थी। यह मामला मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिंकी भुइयां सरमा के खिलाफ कथित तौर पर मानहानिकारक और दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाने के लिए दर्ज किया गया था। खेड़ा ने असम की अदालतों में जाने के लिए ट्रांजिट अग्रिम जमानत मांगी है। जस्टिस के सुजाना ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रखा। आदेश शुक्रवार को सुनाए जाने की संभावना है। खेड़ा की ओर से पेश वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने अदालत में दलील दी कि असम पुलिस द्वारा दर्ज एफआईआर में राजनीतिक बदले की बू आती है। असम पुलिस की ओर से पेश होते हुए असम के एडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया ने हैदराबाद में अग्रिम जमानत याचिका की स्वीकार्यता को चुनौती दी। उन्होंने दलील दी कि दिल्ली के निवासी खेड़ा ने ऐसा कोई कारण नहीं बताया है कि वे असम में याचिका क्यों दायर नहीं कर सकते। असम पुलिस ने पवन खेड़ा के खिलाफ मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश के कथित मामले में केस दर्ज किया है। उनके खिलाफ यह केस तब दर्ज किया गया, जब उन्होंने दावा किया कि रिंकी भुइयां के पास कई विदेशी पासपोर्ट और विदेशों में अघोषित संपत्तियां हैं। मुख्यमंत्री सरमा की पत्नी पर सनसनीखेज आरोप लगाने के बाद से ही कांग्रेस नेता खेड़ा असम पुलिस की नजर में हैं। उन पर भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की 14 धाराओं के तहत केस भी दर्ज किया गया है, जिनमें मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश शामिल हैं। यह विवाद रविवार को पवन खेड़ा की प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने दावा किया कि रिंकी भुइयां सरमा के पास तीन पासपोर्ट, दुबई में अघोषित आलीशान संपत्तियां हैं और अमेरिका में शेल कंपनियां भी हैं। प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद से पवन खेड़ा लापता हैं। बुधवार को उन्होंने मांग की कि मुख्यमंत्री अपनी ताकत दिखाने और पुलिस के पीछे छिपने के बजाय अपने और अपनी पत्नी पर लगे गंभीर आरोपों का जवाब दें। एक वीडियो बयान में उन्होंने कहा कि वह ऐसी चालों से डरने वाले नहीं हैं और सवाल पूछते रहेंगे। सुबोध/०९-०४-२०२६