अंतर्राष्ट्रीय
12-Apr-2026
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इस्लामाबाद,(ईएमएस)। पाकिस्तान की मेजबानी में इस्लामाबाद में आयोजित अमेरिका और ईरान के बीच की महत्वपूर्ण शांति वार्ता बेनतीजा समाप्त हो गई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस वार्ता के किसी भी सार्थक परिणाम तक न पहुंचने पर गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल अब वापस लौट रहा है। हालांकि उन्होंने विफलता शब्द का सीधा प्रयोग नहीं किया, लेकिन उन्होंने इसे एक बुरी खबर जरूर बताया कि इतने प्रयासों के बाद भी दोनों पक्ष किसी साझा सहमति पर नहीं पहुंच सके। जेडी वेंस ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा कि अमेरिका ने ईरान के सामने एक बेहद सामान्य और अंतिम प्रस्ताव (फाइनल ऑफर) रख दिया है। उन्होंने कहा कि इस्लामाबाद में 21 घंटे तक चली बातचीत किसी भी निर्णय पर पहुंचने के लिए पर्याप्त समय था। अब गेंद ईरान के पाले में है और उसे यह तय करना है कि वह इस सर्वश्रेष्ठ और अंतिम प्रस्ताव को स्वीकार करता है या नहीं। बता दें कि इस वार्ता की शुरुआत बड़े पैमाने पर हुई थी। पहले दिन की चर्चा 14 घंटे से अधिक समय तक चली, जिसमें दोनों देशों ने अपने-अपने मसौदे और दस्तावेज पेश किए थे। वार्ता की गंभीरता का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता था कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व वहां की संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बागेर गालबाफ कर रहे थे, जिनके साथ विदेश मंत्री अब्बास अराघची और 71 सदस्यीय एक विशाल दल मौजूद था। वहीं, अमेरिकी दल में उपराष्ट्रपति जेडी वेंस के साथ विशेष दूत स्टीव विटकॉफ और जेरेड कुश्नर जैसे दिग्गज शामिल थे। इस विफलता ने मेजबान देश पाकिस्तान की उम्मीदों पर भी पानी फेर दिया है। पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार और गृह मंत्री मोहसिन नकवी इस पूरी प्रक्रिया में समन्वय कर रहे थे। पाकिस्तान को उम्मीद थी कि यदि युद्धविराम पर सहमति बनती है, तो उसे एक सफल मध्यस्थ के रूप में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी उपलब्धि मिलेगी। ईरान ने पहले ही अमेरिका की प्रतिबद्धता पर संदेह जताया था। पाकिस्तान में ईरान के दूत रज़ा अमिरी मोघदाम ने कहा था कि उनका उद्देश्य ईरानी राष्ट्र के खिलाफ जारी अवैध युद्ध को समाप्त करना है, लेकिन उन्हें अमेरिका पर भरोसा नहीं है। हिजबुल्लाह के करीबी सूत्रों ने भी इस वार्ता का समर्थन किया था, लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच गहरे अविश्वास ने एक बार फिर शांति की राह में रोड़ा अटका दिया है। अब दुनिया की नजरें ईरान के अगले कदम पर टिकी हैं। वीरेंद्र/ईएमएस/12अप्रैल2026