पुणे, (ईएमएस)। महाराष्ट्र के पुणे में महिला संरक्षण गृह से 13 बांग्लादेशी लड़कियों के फरार होने की चौंकाने वाली घटना सामने आई है। यह मामला हडपसर के महंमदवाड़ी रोड स्थित रेस्क्यू फाउंडेशन से जुड़ा है, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। मिली जानकारी के अनुसार, कुछ दिन पहले ही पुणे में फर्जी आधार कार्ड के सहारे रह रही बांग्लादेशी महिलाओं को गिरफ्तार किया गया था। इस बीच अब यह नई घटना सामने आई है। बताया जा रहा है कि एक लड़की ने दवा लेने के बहाने केयरटेकर लक्ष्मी कांबले से दरवाजा खुलवाया। जैसे ही दरवाजा खुला, अन्य चार लड़कियों ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें मेडिकल रूम में बंद कर दिया। इसी दौरान परिसर में सफाई का काम चल रहा था और सुरक्षा गार्ड से मुख्य गेट गलती से खुला रह गया। मौके का फायदा उठाते हुए 13 लड़कियों ने गार्ड को धक्का देकर और उसे काटकर वहां से फरार हो गईं। घटना की जानकारी मिलते ही संस्था ने स्थानीय पुलिस को सूचित किया। पुलिस ने सैय्यदनगर और हडपसर इलाके में सर्च ऑपरेशन चलाकर दो लड़कियों को हिरासत में ले लिया है, जबकि बाकी 11 अब भी फरार हैं। हैरानी की बात यह है कि इस मामले में हडपसर पुलिस ने अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की है और केवल जनरल डायरी में एंट्री की गई है। संस्था के अनुसार, रेस्क्यू फाउंडेशन मानव तस्करी से बचाई गई महिलाओं और लड़कियों के पुनर्वास के लिए काम करता है। संस्था ने यह भी बताया कि 16 मार्च 2024 से उन्हें दी गई पुलिस सुरक्षा हटा ली गई थी। जिला प्रशासन और पुलिस अधिकारियों से कई बार अनुरोध करने के बावजूद सुरक्षा दोबारा बहाल नहीं की गई। संस्था में वर्तमान में क्षमता से अधिक महिलाएं रह रही हैं। फरार हुई लड़कियां बांग्लादेशी नागरिक हैं और उनके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया काफी धीमी है, जिसमें 1 से 2 साल तक का समय लग जाता है। संस्था का कहना है कि इसी वजह से लड़कियों में मानसिक तनाव बढ़ता है और वे इस तरह के कदम उठाने को मजबूर हो जाती हैं। फिलहाल पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर फरार लड़कियों की तलाश कर रही है और कालेपडल पुलिस की टीम इस मामले की जांच में जुटी हुई है। जतिन/संतोष झा-१२ अप्रैल/२०२६/ईएमएस