राज्य
23-Apr-2026


भोपाल(ईएमएस)। जन संघर्ष समन्वय समिति (जेएसएसएस), रचनात्मक कॉंग्रेस एवं बिरसा मिसाइल फोर्स, मध्यप्रदेश, ने केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना के खिलाफ छतरपुर और पन्ना जिलों में चल रहे जन-आंदोलन को अपना मजबूत समर्थन देने की घोषणा की है। प्रतिनिधि मंडल का कहना है कि यह परियोजना बुंदेलखंड के आदिवासी-बहुल क्षेत्रों में जल, जंगल और जमीन के साथ-साथ हजारों परिवारों के जीवन-अस्तित्व के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है। जन संघर्ष समन्वय समिति (जेएसएसएस), मध्यप्रदेश के प्रतिनिधि विजय कुमार, रचनात्मक कॉंग्रेस से समाधान पाटिल एवं बिरसा मिसाइल फोर्स से साधना उइके ने 20 से 22 अप्रैल, 2026 के बीच प्रभावित क्षेत्र का दौरा किया। उन्होंने डूब क्षेत्र के गाँवों का जायजा लिया, विस्थापित होने वाले परिवारों से सीधा संवाद किया और संघर्ष के नेता अमित भटनागर सहित अन्य स्थानीय जन संगठनों के प्रतिनिधियों से मिलकर ज़मीनी हकीकत को समझा। इस दौरान डूब प्रभावित गाँव कूपी में एक सभा का आयोजन किया गया। जिसमें विजय कुमार ने कहा कि “कागजों और योजनाओं की सच्चाई यहाँ की ज़िंदगी से बहुत अलग है। यह लड़ाई सिर्फ जमीन की नहीं है – यह जल, जंगल, जमीन और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की लड़ाई है। जन संघर्ष समन्वय समिति हर उस संघर्ष के साथ खड़ी है जो मानवीय गरिमा और पर्यावरणीय न्याय के लिए लड़ता है।” सभा को सम्बिधित करते हुए समाधान पाटिल ने कहा –“मैंने अपनी आँखों से देखा है कि कैसे बिना किसी सहमति के लोगों के घर और खेत नष्ट किए जा रहे हैं। रचनात्मक कॉंग्रेस हर उस आवाज़ के साथ खड़ी है जो विकास के नाम पर हो रहे इस अन्याय का विरोध करती है। मध्यप्रदेश की भाजपा सरकार को पहले विस्थापितों का पुनर्वास सुनिश्चित करना चाहिए, उसके बाद ही परियोजना पर विचार करना चाहिए। ‘जमीन के बदले जमीन’ कोई सपना नहीं, बल्कि संविधान और मानवाधिकारों की माँग है।” इसी क्रम में साधना उइके ने कहा कि “बिरसा मिसाइल फोर्स की ओर से मैं साफ कहना चाहती हूँ – यह सिर्फ पानी और बिजली का सवाल नहीं है, यह आदिवासी समाज के अस्तित्व का सवाल है। पन्ना टाइगर रिजर्व जैसे संवेदनशील क्षेत्र में बाँध बनाकर हम अपने जंगल, जैव विविधता और अपनी मातृशक्ति को नष्ट कर रहे हैं। हजारों बहनें बेघर होने जा रही हैं। हम इस विस्थापन की मशीनरी के खिलाफ हर सत्याग्रह में किसानों और महिलाओं के साथ खड़ी रहेंगी। सरकार तुरंत मुआवजा राशि 25 लाख करे और हर वयस्क को अलग इकाई माने।” प्रभावित परिवारों की प्रमुख माँगें: · मुआवजा बढ़ाकर ₹25 लाख प्रति परिवार किया जाए। · नकद मुआवजे के बजाय “जमीन के बदले जमीन” और “गाँव के बदले गाँव” का प्रावधान हो। · सर्वेक्षण में हुई गड़बड़ियों को तुरंत सुधारा जाए। · हर वयस्क सदस्य को स्वतंत्र इकाई मानकर मुआवजा दिया जाए। संघर्षरत ग्रामीण “चिता आंदोलन”, “पंचतत्व सत्याग्रह”, “जल सत्याग्रह”, “मिट्टी आंदोलन” और उपवास जैसे प्रतीकात्मक लेकिन अडिग माध्यमों से अपनी आवाज़ बुलंद कर रहे हैं। तीनों संगठनों ने स्पष्ट किया कि वे प्रभावित समुदायों के साथ पूर्ण एकजुटता से खड़े हैं और इन माँगों को हर मंच पर उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। जन संघर्ष समन्वय समिति, रचनात्मक कॉंग्रेस और बिरसा मिसाइल फोर्स सरकार से आग्रह करते हैं कि बिना जन-सहमति और पूर्ण पुनर्वास योजना के इस परियोजना को आगे न बढ़ाया जाए। विस्थापन का मौजूदा मॉडल मानवाधिकारों का उल्लंघन है। हरि प्रसाद पाल / 23 अप्रैल, 2026