पटना, (ईएमएस)। बिहार में प्रारंभिक बाल विकास को मजबूत बनाने के उद्देश्य से सामाजिक कल्याण विभाग के अंतर्गत आईसीडीएस निदेशालय ने दिव्यांगता स्क्रीनिंग और प्रारंभिक पहचान के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) जारी की। साथ ही अभिभावकों की जागरूकता और सहभागिता बढ़ाने के लिए हमारे बच्चे, हमारा परिवार” नाम से एक विशेष व्हाट्सऐप कम्युनिटी प्लेटफॉर्म भी लॉन्च किया गया। इन पहलों का शुभारंभ यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से आयोजित राज्यस्तरीय पोषण पखवाड़ा कार्यशाला में किया गया, जो पोषण पखवाड़ा 2026 के समापन के साथ संपन्न हुई। उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने कहा कि बिहार अब समावेशी विकास की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जहां बच्चों की देखभाल, पोषण और विकास में देरी की समय पर पहचान पर विशेष जोर दिया जा रहा है। उन्होंने यूनिसेफ के सहयोग की सराहना करते हुए कहा कि यह पहल विशेष जरूरत वाले बच्चों की समय पर पहचान और उचित देखभाल सुनिश्चित करेगी। सामाजिक कल्याण विभाग की सचिव वंदना प्रेयसी ने पोषण, स्वास्थ्य और शिक्षा के बीच समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि आंगनबाड़ी केंद्र अब प्रारंभिक शिक्षा और महिला सशक्तिकरण के केंद्र के रूप में उभर रहे हैं। यूनिसेफ बिहार प्रमुख मोनिका नील्सन ने कहा कि छह वर्ष से कम आयु के लगभग 2 करोड़ बच्चों वाले बिहार में प्रारंभिक बाल विकास में निवेश सामाजिक और आर्थिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। कार्यक्रम में आईसीडीएस निदेशक योगेंद्र सागर ने बताया कि आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षित कर राज्यभर में प्रारंभिक पहचान प्रणाली को मजबूत किया जाएगा। इस अवसर पर आंगनबाड़ी बच्चों ने पोषण और बाल विकास पर आधारित सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए। विशेषज्ञों ने बताया कि 6 वर्ष की आयु तक बच्चों के मस्तिष्क का लगभग 85% विकास हो जाता है, इसलिए शुरुआती पहचान और देखभाल बेहद जरूरी है। कार्यक्रम में कई वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद रहे, जिनमें राज्य स्वास्थ्य समिति के कार्यकारी निदेशक अमित कुमार पांडेय, मिड-डे मील निदेशक विनायक मिश्रा, पंचायती राज निदेशक नवीन कुमार सिंह और आईसीडीएस संयुक्त निदेशक भारती प्रियंवदा शामिल थे। संतोष झा-२५ अप्रैल/२०२६/ईएमएस