मुंबई, (ईएमएस)। बॉम्बे हाई कोर्ट ने मुंबई की प्रमुख कंपनी गोदरेज एंड बॉयस मैन्युफैक्चरिंग कंपनी लिमिटेड द्वारा दायर याचिकाओं को खारिज कर दिया। ये याचिकाएं मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना के लिए अधिग्रहित 10 एकड़ जमीन के मुआवजे को लेकर दायर की गई थीं। कंपनी का दावा था कि उसे मात्र 264 करोड़ रुपये का “बेहद कम” मुआवजा दिया गया है। इस पर कंपनी ने उचित मुआवजा बढ़ाने के लिए भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण में आवेदन किया था। - क्या था मामला ? यह जमीन मुंबई के विक्रोली गांव में स्थित है, जिसे 15 सितंबर 2022 को अधिग्रहित किया गया था। कंपनी ने 2019 में अधिग्रहण प्रक्रिया को भी चुनौती दी थी, लेकिन 9 फरवरी 2023 को हाई कोर्ट ने उस याचिका को खारिज कर दिया था। इसके बाद कंपनी सुप्रीम कोर्ट पहुंची, जहां 24 फरवरी 2023 को उसकी विशेष अनुमति याचिका भी खारिज कर दी गई। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने यह जरूर कहा था कि मुआवजा बढ़ाने से जुड़े मामले का निपटारा छह महीने के भीतर किया जाए। पहली याचिका में कंपनी के वकील विनीत नाईक और बछुभाई मुनिम ने भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण के उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें कलेक्टर को देरी से लिखित जवाब दाखिल करने की अनुमति दी गई थी। दूसरी याचिका में नेशनल हाई स्पीड रेल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एनएचएसआरसीएल) को सुनवाई के दौरान अपने लिखित जवाब में संशोधन की अनुमति देने का विरोध किया गया था। न्यायमूर्ति मनीष पितले और श्रीराम शिरसाट की खंडपीठ ने राज्य सरकार और एनएचएसआरसीएल की दलीलों को स्वीकार किया। राज्य की ओर से देरी का कारण बताया गया कि अभी तक कलेक्टर और डिप्टी कलेक्टर के प्रतिनिधित्व के लिए उचित व्यवस्था नहीं बनी थी। कोर्ट ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अनिल सिंह की इस दलील से सहमति जताई कि मामलों में अत्यधिक तकनीकी दृष्टिकोण नहीं अपनाया जाना चाहिए। हाई कोर्ट ने कहा, “अब कंपनी को केवल मामले को मेरिट के आधार पर लड़ना है। इससे उसे कोई नुकसान नहीं माना जा सकता।” इस फैसले के बाद अब गोडरेज एंड बॉयस को मुआवजे से जुड़े अपने दावे को भूमि अधिग्रहण पुनर्वास एवं पुनर्स्थापन प्राधिकरण के समक्ष तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर साबित करना होगा। - २५ अप्रैल/२०२६/ईएमएस