राज्य
25-Apr-2026
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पटना, (ईएमएस)। बिहार में भले ही सम्राट चौधरी के सिर पर सत्ता का ताज सज गया है, लेकिन यह ताज फिलहाल कांटों भरा नजर आ रहा है। नीतीश कुमार द्वारा सत्ता हस्तांतरण के बाद नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती भाजपा और जदयू के बीच संतुलन बनाए रखने की है। राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि मुख्यमंत्री बनने के बाद सम्राट चौधरी को सबसे पहले अपनी ही पार्टी के भीतर असंतोष को शांत करना होगा। खासकर विजय कुमार सिन्हा जैसे वरिष्ठ नेताओं के साथ तालमेल बैठाना आसान नहीं दिख रहा है। दोनों नेताओं के बीच पहले समान राजनीतिक कद माना जाता रहा है, ऐसे में अब पद और प्रभाव के अंतर को लेकर असहजता की स्थिति बनी हुई है। दरअसल, उपमुख्यमंत्री रहते हुए विजय सिन्हा ने हड़ताल पर गए राजस्व पदाधिकारियों (सीओ) को निलंबित कर दिया था। लेकिन मुख्यमंत्री बनने के तुरंत बाद सम्राट चौधरी ने इस निलंबन को वापस ले लिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह कदम विजय सिन्हा के लिए एक बड़ा झटका साबित हुआ है और इससे पार्टी के भीतर संदेश भी गया है कि अब अंतिम निर्णय का अधिकार मुख्यमंत्री के पास ही है। वहीं, गठबंधन सहयोगी जदयू के साथ तालमेल बनाना भी सम्राट चौधरी के लिए बड़ी चुनौती बनकर उभर रहा है। जनता दल (यूनाइटेड) के नेताओं ने पहले ही अपने संकेत देने शुरू कर दिए हैं। जदयू विधायक दल के नेता श्रवण कुमार ने स्पष्ट कर दिया है कि मंत्रिमंडल में उनकी पार्टी का प्रतिनिधित्व भाजपा से अधिक होना चाहिए। इसके अलावा गृह विभाग जैसे महत्वपूर्ण मंत्रालय को लेकर भी जदयू दबाव बना रहा है। अगर गृह विभाग जदयू को नहीं मिलता है, तो पार्टी विधानसभा अध्यक्ष पद की मांग कर सकती है। इसको लेकर भी अभी स्थिति साफ नहीं है और दोनों दलों के बीच बातचीत जारी है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि सम्राट चौधरी के सामने एक और बड़ी चुनौती नीतीश कुमार की लंबी राजनीतिक छाया से बाहर निकलने की होगी। नीतीश कुमार ने करीब दो दशकों तक बिहार की सत्ता संभाली है, ऐसे में प्रशासनिक और राजनीतिक ढांचे पर उनकी पकड़ अब भी मजबूत मानी जाती है। ऐसी स्थिति में नई सरकार के लिए भाजपा के एजेंडे को लागू करते हुए जदयू के साथ संतुलन बनाए रखना आसान नहीं होगा। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी को एक तरफ अपनी पार्टी के भीतर संतोष बनाए रखना है, तो दूसरी ओर गठबंधन सहयोगी की अपेक्षाओं को भी पूरा करना है। कुल मिलाकर, बिहार की नई सरकार की राह फिलहाल आसान नहीं दिख रही है। सत्ता का यह ताज जितना आकर्षक है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी साबित हो रहा है। आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि सम्राट चौधरी इन राजनीतिक चुनौतियों से कैसे निपटते हैं और सरकार को किस दिशा में आगे बढ़ाते हैं। - २५ अप्रैल/२०२६/ईएमएस