राष्ट्रीय
26-Apr-2026


बड़वानी,(ईएमएस)। मध्य प्रदेश के बड़वानी जिले से प्रशासनिक लापरवाही का चौंकाने वाला मामला सामने आया है, इस मामले ने सरकारी सिस्टम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं। पाटी तहसील में जनगणना प्रशिक्षण के लिए जारी की गई सूची में उस शिक्षक का नाम शामिल किया गया, जिनका 13 अप्रैल को ही निधन हो चुका था। जैसे ही यह सूची सार्वजनिक हुई, शिक्षा विभाग और तहसील कार्यालय में हड़कंप मच गया। तहसीलदा द्वारा जारी आदेश के अनुसार 27 से 29 अप्रैल तक जनगणना का विशेष प्रशिक्षण आयोजित किया जाना था। इसके लिए कुल 32 कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई गई थी। इसी सूची में क्रमांक 23 पर प्राथमिक विद्यालय रावतलिया फलियां चाकलया के शिक्षक संतोष मालवीय का नाम दर्ज था। विडंबना यह रही कि जिस व्यक्ति को घर-घर जाकर जनगणना का कार्य सौंपा गया, वह इस दुनिया में ही नहीं था। यह मामला केवल एक नाम तक सीमित नहीं रहा, बल्कि प्रशिक्षण के दौरान 32 अन्य कर्मचारियों की अनुपस्थिति ने भी प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए। तहसीलदार ने इसे गंभीर मानते हुए सभी अनुपस्थित कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है और अनुशासनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी है। इस चूक पर सफाई देकर तहसीलदार ने कहा कि उन्हें शिक्षक के निधन की जानकारी नहीं थी और यह गलती तकनीकी कारणों से हुई। उनके अनुसार, मानव संसाधन पोर्टल पर पुराना डेटा अपडेट नहीं किया गया था, जिसके चलते यह नाम सूची में शामिल रह गया। अब रिजर्व सूची से नए कर्मचारी को नियुक्त कर सूची में संशोधन किया जा रहा है। सूत्रों के अनुसार, इस तरह की त्रुटियां अक्सर इसलिए होती हैं क्योंकि कई बार अधिकारी नई सूची तैयार करने के बजाय पुरानी सूची को कॉपी-पेस्ट कर काम चला लेते हैं। यदि समय पर डेटा अपडेट नहीं किया जाए, तो ऐसी गंभीर गलतियां सामने आना तय है। यह घटना प्रशासनिक ढांचे में डेटा प्रबंधन और जवाबदेही की कमी को उजागर करती है। साथ ही यह भी संकेत देती है कि डिजिटल सिस्टम होने के बावजूद मानवीय लापरवाही बड़ी समस्या बनी हुई है। ऐसे मामलों में पारदर्शिता और समय पर सुधार ही जनता का भरोसा बनाए रख सकते हैं। आशीष दुबे / 26 अप्रैल 2026