राष्ट्रीय
26-Apr-2026


पटना (ईएमएस)। बिहार में नई एनडीए सरकार के गठन के बाद अब सभी की निगाहें मंत्रिमंडल विस्तार पर आकर टिक गई हैं। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और उपमुख्यमंत्रियों के शपथ लेने के बावजूद अभी तक पूर्ण कैबिनेट का गठन नहीं हुआ है। इस देरी को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है, हालांकि बिहार सरकार की ओर से सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा बताया जा रहा है। उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी ने स्पष्ट किया कि मंत्रिमंडल का विस्तार “जल्द” होगा और इसमें किसी तरह की असामान्य देरी नहीं है। उन्होंने कहा कि फिलहाल औपचारिकताओं और आंतरिक चर्चाओं का दौर चल रहा है। हालांकि उन्होंने कोई निश्चित तारीख नहीं बताई, लेकिन सूत्रों के अनुसार भाजपा और जदयू के बीच विभागों के बंटवारे पर करीब सहमति बन चुकी है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पूर्व सीएम नीतीश कुमार इस बार भी अपने भरोसेमंद और अनुभवी चेहरों को प्राथमिकता दे सकते हैं, ताकि प्रशासनिक निरंतरता बनी रहे। वहीं भाजपा की ओर से कुछ नए और युवा चेहरों को शामिल करने की रणनीति पर भी काम हो रहा है, जिससे आगामी 2025 विधानसभा चुनावों के लिए सकारात्मक संदेश दिया जा सके। इस बीच जदयू में एक नया नाम नीतिश के सुपुत्र निशांत कुमार का नाम चर्चा में है। अब तक सक्रिय राजनीति से दूरी बनाए रखने वाले निशांत को लेकर पार्टी के भीतर मांग उठ रही है कि वे बड़ी भूमिका निभाएं। विजय चौधरी ने उन्हें “सर्वमान्य नेता” बताकर संकेत दिया कि वे धीरे-धीरे पार्टी गतिविधियों में सक्रिय हो रहे हैं। इससे यह अटकलें तेज हो गई हैं कि जदयू भविष्य के नेतृत्व को लेकर सोच-विचार कर रही है। वहीं सम्राट चौधरी सरकार के कैबिनेट विस्तार में सबसे बड़ी चुनौती जातीय और क्षेत्रीय संतुलन बनाना है। जदयू अपने पुराने सफल मंत्रियों को फिर मौका देना चाहती है, जबकि भाजपा नए समीकरण साधने की कोशिश में है। कुल मिलाकर, सम्राट सरकार की ओर से “सब कुछ सामान्य” होने का संदेश दिया जा रहा है, लेकिन मंत्रियों की कमी के कारण प्रशासनिक दबाव बढ़ रहा है। इसके बाद संभावना है कि अगले 48 से 72 घंटों के भीतर कैबिनेट विस्तार हो सकता है, जिससे मौजूदा सस्पेंस खत्म होगा और शासन-प्रशासन को गति मिलेगी। आशीष दुबे / 26 अप्रैल 2026